SC ने NEET से हटाई रोक


Supreme court

आज सुप्रीम कोर्ट ने  CBSE NEET 2017 परीक्षा परिणाम घोषित करने से रोक हटाते हुए कहा की CBSE अपना रिजल्ट कर सकता है | इस परीक्षा के द्वारा छात्रों को उन कॉलेजों में ही प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है | इस फैसले से  नीट परीक्षा देने वाले छात्रों का आज इंतजार खत्म हो जाएगा | सूत्रों के अनुसार CBSE आज ही अपना नीट का रिजल्ट की नोटिफिकेशन अपनी ऑफिशल वेबसाइट पर ढाल सकती है |

गौरवलब है कि मद्रास उच्च न्यायालय ने MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए होने वाली नीट परीक्षा की घोषणा पर अंतरिम स्थान लगा दिया था। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह पहले से तय कार्यक्रम के आधार पर परीक्षा परिणाम की घोषणा काउंसेलिंग और दाखिला करें। न्यायमूर्ती पीसी पंत और न्यायमूर्ती दीपक गुप्ता की अवकाश पीठ ने कहा कि परीक्षा परिणाम की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसेलिंग और दाखिला न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा।

पीठ ने कहा कि परीक्षा परिणाम की घोषणा और उसके बाद होने वाली काउंसेलिंग और दाखिला न्यायालय के समक्ष लंबित मामले के फैसले के अधीन होगा। पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों से अनुरोध किया कि वे नीट परीक्षा 2017 से संबंधित किसी भी याचिका को स्वीकार ना करें । सीबीएसई की ओर से मद्रास उच्च न्यायालय के 24 मई के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने यह आदेश दिया । मद्रास उच्च न्यायालय ने सीबीएसई द्वारा नीट परीक्षा नीट परीक्षा 2017 के परिणामों की घोषणा करने पर रोक लगा दिया।

यह है पूरा मामला 

सीबीएसई ने मद्रास हाईकोर्ट में इस बात से इंकार किया था कि वह एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए NEET 2017 के लिए रीजनल भाषाओं के क्वेश्चन पेपर अंग्रेजी के क्वेश्चन पेपर के मुकाबले आसान थे | जिन्हे बच्चों को कोई दिक्क्त का सामना नहीं करना होगा |

परीक्षा में कथित असमानता का हवाला देते हुए हाल में हुई NEET परीक्षा को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर जवाबी हलफनामे में सीबीएसई ने इस बात को खारिज किया था कि गुजराती जैसे क्षेत्रीय भाषाओं के क्वेश्चन अंग्रेजी की तुलना में आसान थे |

याचिकाओं पर अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन ने 24 मई को NEET नतीजों के प्रकाशन पर रोक लगाई थी और एमसीआई, सीबीएसई निदेशक और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जवाबी हलफनामे देने का निर्देश दिया था |