फुलैरा दूज : 17 फरवरी को है फाल्गुन का सबसे शुभ दिन, कर सकते हैं सभी शुभ काम, ये है मुहूर्त


FULLARA DUJ

फाल्गुन महीने में शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को ‘फुलैरा दूज’ मनाई जाती है। इसे फाल्गुन मास का सबसे पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। उत्तर भारत में गांवों में आज भी इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।

Fulaira Duj

फुलैरा दूज हिंदू कैलेंडर के हिसाब से फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष द्वितीय को मनाई जाती है। साल 2018 में यह 17 फरवरी को मनाई जाएगी। फुलैरा दूज का समय 17 फरवरी दिन 3.56 से शुरू होकर 18 फरवरी शाम 4.50 तक रहेगा।

Hindu calendar

आपको बता दे कि बसंत से जुड़ा यह त्योहार, खेतों में छाए सरसों के पीले फूलों की तरह सभी के हृदय में बस जाता है। यह उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रचलित है। भगवान कृष्ण एवं राधा के प्रेम का त्योहार है।

sarso ke phool

आज ही के दिन से सूखी होली की शुरुआत हो जाती है एवं होलिका दहन तक गुलाल से होली ब्रज में एवं इसके आस पास के क्षेत्रों में अत्यधिक देखने को मिलती है। उत्तरांचल में भी सूखी होली का विशेष त्योहार बड़े ज़ोर शोर से मनाया जाता है।

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आज के दिन कई घरों में आंगन में रंगोली सजाई जाती है जिसे की होली बैठना के रूप में भी माना जाता है। फिर होलिका दहन के दिन छोटे छोटे गोबर के उपलों से होलिका जलाई जाती है। इसकी अग्नि गांव के मुख्य चौपाल पर जो होलिका जलाई जाती है। वहां से अग्नि ला कर समस्त गांव वाले अपने अपने घरों में भी इन उपलों की होलिका जलते हैं। माना जाता है ऐसा करने से घर के समस्त रोग, शोक , क्लेश, चिन्ताएं सभी खत्म होती हैं।

rangoli krishana

बता दे कि इस दिन राधा-कृष्ण को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाता है। इस दिन से लोग होली के रंगों की शुरुआत भी करते हैं। यह दिन सभी दोषों से मुक्त माना जाता है। मान्‍यता है कि फुलैरा दूज के दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। फुलैरा दूज को अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं।

rangoli krishana

इस दिन श्रीराधा-कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन को विवाह के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। फुलैरा दूज पर श्रीराधा-कृष्ण की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।

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