कम नींद लेना स्वास्थय के लिए हानिकारक


केस स्टडी से पता चला है कि छह घंटे से कम नींद लेने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम होता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीडि़त लोगों पर मृत्यु का आभार दोगुना हो जाता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम डाइबीटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे के कॉम्बिनेशन से होता है। एक अधययन में बताया गया है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीडि़त लोग छह घंटे से ज्यादा की नींद लेते हैं तो उनमें स्ट्रोक के कारण से मौत का खतरा 1.49 गुना हो जाता है। जबकि छह घंटे से कम सोने वालों पर हृदय रोग और स्ट्रोक की संभवाना 2.1 फीसदी हो जाती है।

नींद न लेने पर हो सकती हैं कई बीमारियां-


एक अधययन के अनुसार न्यूयॉर्क के वैज्ञानिकों ने इस तथ्य में पाया है कि कम नींद लेने वालों में किडनी खराब होने की संभावना 20 फीसदी बढ़ जाती है। मुख्य शोधकर्ता इलिनोइस यूनिवर्सिटी के एक वैज्ञानिक के अनुसार आधी-अधूरी नींद लेने से क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) का खतरा बढ़ जाता है। नींद और किडनी के खराब होने का सीधा संबंध होता है। एक ओर शोधकर्ताओं ने बताया कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीडि़त लोगों का कम नींद लेने से मौत का खतरा बिना मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीडि़त लोगों की तुलना में 1.99 प्रतिशत बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के सहायक और इस अधययन के मुख्य लेखक जूलियो फर्नांडीस मेंडोजा ने कहा कि अगर आप हृदय रोग से गुजर रहें हैं तो आपको अपनी नींद का पूरा ध्यान रखें नहीं तो आप इस जोखिम से बचने के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

फेफड़ों के कैंसर के खतरे का बढऩा-


शिकागो और बार्सिलोना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह बताया कि कम सोने से सोते वक्त सांस लेने में तकलीफ होती है जिसके कारण फेफड़ों में कैंसर का खतरा बना देती है। जिसके कारण एक्सोजोम की संख्या में इजाफा हो जाता है। एक्सोजोम श्वेत रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है। यह कोशिकाओं के संचार को बाधित करते हैं और यह ट्यूमर को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार होते हैं।