देश में दोगुने हुए किडनी के मरीज


नई दिल्ली: देश में किडनी की बीमारियों को लेकर जागरूकता का आभाव है। शायद यही वजह है कि यहां इन रोगों की ठीक से जांच नहीं होती। इसकी वजह से पिछले 15 वर्षों में देश में किडनी के मरीजों की संख्या दोगुणी हो गई है। चिंताजनक बात यह है कि इसकी वजह से डायलिसिस के मरीजों की संख्या में भी दस से पंद्रह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इनमें बड़ी संख्या बच्चों की है।

किडनी की बीमारी के शुरुआत में इसके काम करने की गति धीरे-धीरे कम होती है। और जब यह पूरी तरह से बीमारी से ग्रसित हो जाता है, तब काम करना बंद कर देता है। जागरूकता के आभाव में कैंसर की ही तरह इस रोग का पता तब चलता है जब किडनी करीब एक चौथाई खराब हो जाती है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार अगर एक बार किडनी खराब हो जाए तो इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। किडनी के खराब हो जाने पर विषाक्त पदार्थ शरीर के अंदर से नहीं निकल पाते। जो अंदर रह कर अन्य कइ तरह की परेशानियों को जन्म देने लगते हैं। इससे बचने के लिए विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के लिए डॉयलिसिस कराना पड़ता है। कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि शुगर और हाई ब्लड प्रेशर से किडनी खराब हो जाती है।