नींद में खर्राटे लेना खतरनाक


नई दिल्ली : अगर आप भी नींद में खर्राटा लेते हैं तो सावधान हो जाइए। क्योंकि खर्राटे का मतलब होता है सांस लेने में परेशानी। डॉक्टरों के अनुसार सोते समय कोशिकाओं में जाने वाले ऑक्सीजन की कमी की वजह से खर्राटे आते हैं। इसकी अनदेखी अपके नींद के साथ ही आपका स्वास्थ्य भी बिगाड़ सकती है।

एक निजी कंपनी के सर्वे के अनुसार करीब 93 प्रतिशत भारतीय कम नींद आने की समस्या से पीडि़त हैं। यह समस्या पुरूषों से ज्यादा महिलाओं में पाई गई है। खास बात यह है कि ज्यादातर लोगों को इस बात का आभास तक नहीं है कि वह कम नींद आने की समस्या से पीडि़त है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार नींद में कमी की समस्या के कई प्रकार होते हैं। इनमें नार्कोलेप्सी, इन्सोम्निया और स्लीप एम्निया प्रमुख हैं। इनमें से स्लीप एम्निया (खर्राटे लेना)सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार लैपटॉप व स्मार्ट फोन का अत्यधिक इस्तेमाल, अनियमित जीवन शैली, एलर्जी, जुकाम, श्वसन अंगों में संक्रमण, घुटने व सिर में दर्द, निरंतर थकान या मल त्याग करने में जलन से नींद में कमी आ जाती है। इससे वजन बढऩा, हार्ट अटैक और मनोचिकित्सकीय समस्याएं हो सकती हैं। नींद की वजह से अक्सर लोग नींद की दवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं। इन दवाओं से नींद तो आती है, मगर इसके साथ ही साइड इफेक्ट के तौर पर सुस्ती, चक्कर आना, भूख कम लगना, सांस लेने में कठिनाई और ध्यान लगाने में दिक्कत सरीखी कई परेशानियां भी बिन बुलाए आ जाती हैं।

इंडियन मेडीकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल के अनुसार नींद में कमी का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वजह क्या है? आम तौर पर नियमित दिनचर्या में कैफीन व एल्कोहल का कम सेवन, सक्रिय जीवन और नियमित दिनचर्या से इस पर काबू पाया जा सकता है।

कैफीन- यह नींद लाने में सहायक ऐडीनोसीन के प्रभाव को कम कर देता है। इससे बार-बार मूत्र आता है। जिससे नींद उचट जाती है।

एल्कोहल –  यह नर्वस सिस्टम को दबाता है। नींद न आने के दस प्रतिशत मामलों के लिए यही जिम्मेदार होता है। यह सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है और खर्राटे लेने की समस्या को और बढ़ा सकता है।