इस रत्न को लोहे की अंगूठी में पहनेंगे तो मिल सकती है धन के साथ-साथ प्रसिद्धि भी


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ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार से शनि ग्रह का रत्न नीलम होता है। इसे कई तरह के नाम भी हैं जिनसे इन्हें बोलया जाता है। इसे नील, नीलमाण व हिन्दी में नीलम में नीलमाण व हिन्दी में नीलम और इंग्लिश में सैफायर कहते हैं। ऐसा माना जाता है जिनकी कुंडली में मकर या तुला राशि में शनि होता है तो वह व्यक्ति हमेशा ही धनी और सुखी रहता है।

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अगर कुंडली के प्रथम भाव में शनि होता है तो व्यक्ति के जीवन में धन की कमी हमेशा ही बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि शनि केअशुभ फल को दूर करने के लिए नीलम को धारण किया जाता है।

Gemstone Neelam

क्या है नीलम धारण करने की विधि

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नीलम 3, 5, 7, 9 या 12 रत्ती का लोहे अथवा सोने की अंगूठी में जड़वाकर शुक्ल पक्ष के शनिवार को पुष्प, उभा, चित्रा, धनिष्ठा या शतभिषा नक्षत्र में धारण करना चाहिए। ध्यान रखें किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से अपनी कुंडली अध्ययन करवाने के बाद ही नीलम धारण करना चाहिए।

क्या है नीलम धारण करने के लाभ

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नीलम धारण करने से धन, यश, प्रसिद्धि, जॉब, व्यवसाय और वंश में वृद्धि होती है। औषधि के रूप में नीलम से दमा, क्षय, कुष्ठ रोग, खांसी, नेत्र रोग, मस्तिष्क के विकारों में भी लाभ होता है।

असली नीलम की पहचान

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रत्न विक्रेता विनीश पटेल बताते हैं कि नीलम 35 रूपये प्रति कैरट से लेकर 50 हजार रूपये प्रति कैरेट तक का होता है। अगर व्यक्ति को नीलम पहचानने की थोड़ी सी समझ हो तो रत्न की खरीदारी में ठगे जाने की संभावना कम रहती है। अच्छी क्वालिटी के नीलम को अगर दूध में डाल दिया जाए तो दूध का रंग नीला दिखता है।

पानी से भरे कांच के गिलास में नीलम को रखें तो पानी के ऊपर नीली किरण दिखाई देगी। असली नीलम चमकीला और चिकना होता है। मोर के पंख के समान इसका रंग नीला होता है। यह पूरी तरह से पारदर्शी होता है इसके ऊपर रोशनी डालने पर नीली आभा छिटकती है।

नीलम धारण करने का तरीका

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नीलम शनिवार को पंचधातु, स्टील या चांदी की अंगूठी में शुक्लपक्ष में पूजा पाठ के बाद सूर्यास्त के दो घंटे पहले दाहिने हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए। नीलम कम से कम पांच रत्ती का होना चाहिए। लेकिन नीलम के साथ केवल पन्ना, हीरा और गोमेद ही धारण करना चाहिए।