Lohri Special : क्यों मनाया जाता है ‘लोहड़ी’ का त्यौहार, जानिये इसका महत्व !


Lohri Festival

आज लोहड़ी का त्यौहार है जो पूरे उत्तर भारत में पूरे जोशों खरोश के साथ मनाया जाता है। आपको बता दें मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाल लोहड़ी का त्यौहार धर्म के लिहाज़ से काफी महत्वपूर्ण है और देश के अलग अलग हिस्स्सों में अलग अलग तरीकों और मान्यताओं के साथ मनाया जाता है।

Lohri Festivalये एक तरह से खुशियाँ बांटने का त्यौहार है जिसमे लोग शाम को घरों के बाहर अलाव जलाते है और इकट्ठा होकर आग के किनारे बैठ कर इस त्यौहार को मनाते है। इसके साथ ही रेवड़ी , मूंगफली और गजक आदि बांटकर खाया जाता है।

Lohri Festivalअग्नि को इस त्यौहार में मुख्य देवता माना जाता है और इसलिए तिल से अग्नि की पूजा के बाद इसके चारों ओर गीत गाये जाते है और ख़ुशी में नाचा भी जाता है। बड़े बुजुर्ग तो शायद लोहड़ी मनाने की महत्ता जानते है पर शायद आज की पीढ़ी इस त्यौहार के बारे में इतना नहीं जानती तो आईये आज जानते है की क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार।

Lohri Festivalपुरानी मान्यताओं के अनुसार हिन्दू धर्म में लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएँ भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से ‘त्योहार’ (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है।

Lohri Festivalयज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में ‘खिचड़वार’ और दक्षिण भारत के ‘पोंगल’ पर भी-जो ‘लोहड़ी’ के समीप ही मनाए जाते हैं-बेटियों को भेंट जाती है।

Lohri Festivalपंजाबी समुदाय में भी लोहड़ी पर्व विशेष महत्व रखता है। इस दिन बच्चे टोलियाँ बनाकर घर -घर जाकर लकड़ियाँ इकठ्ठा करते है और रात को होलिका दहन की तरह ही लकड़ियाँ जलाकर खूब भंगड़ा किया जाता है गीत गए जाते है।

Lohri Festivalपंजाब प्रान्त में भी इस पर्व को लेकर एक कथा खूब प्रचलित है की मुग़ल काल में दुल्ला भट्टी नामक युवक पंजाब लड़कियों की रक्षा की थी। मुगलों के आतंक में बहुत सी लड़कियों को अमीर सौदागरों को बेचा जा रहा था और दुल्ला भट्टी ने इन लड़कियों को आजाद करवा कर उनकी शादी हिन्दू समाज में कराई थी।

Lohri Festivalलोहड़ी के मौके पर लोग दुल्ला भट्टी को एक नायक के तौर पर याद करते है और गीत गाते है।किसानों के लिए भी ये त्यौहार काफी महत्वपूर्ण है और किसान रबी की फसल आने की ख़ुशी में देवताओं का शुक्रिआदा करते है और ख़ुशी मनाते है।

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