जानिए द्रौपदी से जुड़े कुछ अनसुने दिलचस्प तथ्यों के बारे में


हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे महान महाकाव्यों में से एक है महाभारत। महाभारत के बारे में बच्चे से लेकर बड़ों तक को सबकुछ ही पता है। महाभारत की कहानियों के बारे में आप सब ही जानते हैं। आज हम आपको महाभारत केकुछ ऐसी अनसुने राज के बारे में बताएंगे जिसके बारे में आप नहीं जानते होंगे।

आज हम महाभारत के कुछ ऐसे राजों के बारे में आपको बताएंगे जिनके बारे में दुनिया को कुछ नहीं पता है। आज भी कई बातों पर लोगों को नहीं पता है और रहस्य ही बना हुआ है। महाभारत के इस महाकाव्य के काफी दिलचस्प तथ्य हैं और यह महाकाव्य ने सारे दिलचस्प तथ्यों से ही भरा हुआ है। इन तथ्यों के बारे में कभी बताया नहीं गया है और न ही टेलीविजन पर कभी दिखाया गया है।

महाभारत में द्रौपदी थी उसके बारे में तो हम सबको ही पता है। द्रौपदी महाभारत में एक ऐसी रहस्यमयी पत्नी के रूप में दिखाई गर्ई है। द्रौपदी ने हजारों कष्टों को सहा है और हर परेशानी का दृढ़ निश्चय से सामना किया। द्रौपदी उस समय की सबसे प्रतिष्ठित राज्यों में से एक की राजकुमारी थी। ऐसा कहा जाता है कि द्रौपदी सामान्य बच्चों की तरह पैदा नहीं हुर्ई थी वह आग से पैदा हुई थी।

कर्ई ऐसी सारी बातें हैं जो द्रौपदी के बारे में आपकेा आश्चर्यचकित कर देंगी। तो बताते हैं क्या हैं द्रौपदी के पीछे छिपे हुए राज।

आस्था

द्रौपदी ने प्राचीन काल में भी दुखों को चुपचाप सहने में किसी भी तरह का विश्वास नहीं रखती थी। द्रौपदी के साथ जो भी दुव्र्यवहार होता था तब वह न्याय केलिए अपनी आवाज उठाती थी। द्रौपदी ने अपने महान पतियों भीष्म, द्रोणा, कृपाचार्य इन सब योद्धाओं की निंदा की थी कि उन सबने उन्हें चीर-हारण के दौरान हो रहे अपमान में नहीं बचाया था।

द्रौपदी का आग से जन्म हुआ था

द्रौपदी को यज्ञसेनी के रूप से भी जाना जाता है। द्रौपदी का जन्म एक साधारण बच्चे केजैसे नहीं हुआ था। द्रौपदी अपनी मां के गर्भ से पैदा नहीं हुर्ई थी। द्रौपदी एक वयस्क के रूप में आग से पैदा हुई थी।

द्रौपदी को काली का अवतार भी माना जाता है

दक्षिण भारत में यह माना जाता है कि द्रौपदी महाकाली का अवतार थी। ऐसी मान्यता है कि उसने इसलिए जन्म लिया था क्योंकि वह अभिमानी कौरवों को नष्ट करने के लिए भगवान कृष्ण की सहायता कर सके।

द्रौपदी ने कुत्तों का शाप दिया था

ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी केसाथ एक समय में एक ही पांडव रहता था। जो भी द्रौपदी के कमरे में जाता था वह पहले कमरे में जाने से पहले अपने जूतों का संकेत देता था। लेकिन एक दिन, एक कुत्ते ने युधिष्ठिर का जूता उठा लिया और किसी पांडव ने उन्हें युधिष्ठिïर के साथ देख लिया। इससे क्रोधित होकर द्रौपदी ने कुत्तों को शाप दिया कि ”सभी कुत्तों को दुनिया के सामने सार्वजनिक रूप से संभोग करना होगा।”

द्रौपदी का रसोईघर

भारत भर में ‘द्रौपदी का रसोईघर’ शब्द का अर्थ ऐसे रसोईघर से है जिसमें सब कुछ मौजुद हो। कहा जाता है कि ऐसे रसोर्ई घर की निशानी अच्छे घर की होती है।

द्रौपदी को कुंवारी का आशीर्वाद मिला था

द्रौपदी को पांच पति थे लेकिन उन्हें कुंवारी रहने का आशीर्वाद मिला हुआ था। द्रौपदी जीवनभर कुंवारी ही रही थी और वह इस अवस्था में आग में ही जल गई थी।

द्रौपदी को पतियों पर भरोसा नहीं था

जब द्रौपदी का चीर-हरण हो रहा था तब वह भरी सभा में चिल्लाती रही लेकिन उनका एक भी पति द्रौपदी को बचाने नहीं आया था। द्रौपदी के किसी भी पति ने साहस नहीं दिखाया था द्रौपदी केअपमान का बदला लेने के लिए। यही वजह थी कि द्रौपदी अपने पतियों पर विश्वास नहीं कर पाई थी।

हिडिम्बा का बदला

भीम की पत्नी हिडिम्बा एक चुड़ैल थी। द्रौपदी ने हिडिम्बा के बेटे घटोत्कच को शाप दिया था और इसका बदला लेने के लिए हिडिम्बा ने द्रौपदी को भी शाप दे दिया था। इस लड़ाई केअंत में पांडव वंश समाप्त हो गया।

अनूठी बात

जब द्रौपदी पाँचों पांडवों की पत्नी बनने के लिए राजी हो गईं थी तो उन्होंने एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह अपने घर को किसी अन्य महिला से नहीं साझा करेगी।

भगवान कृष्णा उनके एकमात्र मित्र थे

भगवान कृष्ण को द्रौपदी ने हमेशा अपना शाखा (दोस्त) माना। भगवान कृष्ण द्रौपदी के सच्चे दोस्त थे, जो चीर-हरण के वक्त उनके बचाव में आए थे।