नागा साधू/सन्यासिन बनने के लिए महिला को करने पड़ते है ये 7 काम


माना जाता है की नागा साधुओं की दुनिया काफी रहस्मयी होती है और आज तक कोई भी इन अनोखे साधुओं की दुनिया के बारे में स्पष्ट तरीके से जानकारी प्राप्त नहीं कर पाया है। अकसर इन्हें काफी संख्या में बड़े मेलों के दौरान देखा जाता है जैसे भारत में लगने वाला कुम्भ का मेला। ये कहा से आते है और मेले के बाद कहा गायब हो जाते है इस बात के पीछे काफी रहस्य है। इस सभी रहस्यों में से एक है महिला नागा साधू , और काफी लोगों को इनके अस्तित्व के बारे में भी नहीं पता होगा। आज हम आपके लिए लाये है ऐसी जानकारी जो महिला नागा साधुओं के जीवन के कई रोचक तथ्यों से पर्दा उठा देगी और साथ ही ये ऐसी 7 बातें है जो इन्हें अन्य महिला साधुओं से अलग बनाती है।

1.एक महिला को नागा सन्यासिन बनने के पहले 6से 12वर्षों तक कठिन ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है उसके बाद गुरु साधू संतुष्ट होते है की महिला ब्रह्मचर्य का पालन कर सकती है तब उसे नागा सन्यासिन बनने की दीक्षा दी जाती है

2. नागा सन्यासिन बनने से पहले महिला को स्वयं का पिंडदान और तर्पण करना पड़ता है।

3.महिला को नागा सन्यासिन बनाने से पहले उसका मुंडन किया जाता है और नदी में स्नान करवाते हैं। ये एक पारंपरिक रस्म और रिवाज है।

4.महिला को परिवार और समाज के सारे मोह का त्याग करना पड़ता है और इस बात से आश्वस्त करना पड़ता है की वो अब अपना जीवन इश्वर की भक्ति में अर्पित करना चाहती है।

5. नागा साधुओं के साथ ही महिला सन्यासिन भी सिंहस्थ और कुम्भ में शाही स्नान करती हैं, अखाड़े में नागा सन्यासिन को भी पूरा सम्मान दिया जाता है।

6.जब महिला नागा सन्यासिन बन जाती हैं तो अखाड़े के सभी साधु-संत इन्हे माता कहकर सम्बोधित करते हैं। इनके लिए किसी अन्य नाम का प्रयोग वर्जित है।

7.पुरुष नागा साधु और महिला नागा साधु में सिर्फ यही फर्क होता है की महिला होने के नाते ये अपने शरीर पर एक पीला वस्त्र लपेट कर रखती है और शाही स्नान के दौरान भी ये उसी वस्त्र के साथ स्नान करती है।