आज सावन का पहला सोमवार, शिव मंदिरों में गूंजे ‘बम-बम भोले’ के जयकारे


नई दिल्ली : भगवान शिव की आराधना का महीना सावन आज से शुरू हो गया है. आज सावन का पहला सोमवार है, जो देवाधिदेव महादेव की पूजा आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है. आज से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई और देश भर के शिव मंदिरों में भोलेनाथ के जयकारे गूंज रहे हैं.

झारखंड का बाबा वैद्यनाथ धाम

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झारखंड के बाबा वैद्यनाथ धाम में देश के कोने-कोने से शिवभक्त आए हैं.कोई कांवड़ लेकर आया है तो कोई सिर्फ बाबा के दर्शन करने. कई भक्तों ने तो आधी रात को ही बाबा वैद्यनाथ का जलाभिषेक कर लिया है.

उज्जैन का ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर धाम

उज्जैन के महाकालेश्वर में सुबह चार बजे भस्म आरती हुई. भीड़ ऐसी कि महाकाल मंदिर से लेकर क्षिप्रा नदी के किनारे तक महाकाल के भक्त ही भक्त दिखाई दिए. सावन का ये पहला सोमवार है, इसलिए कोई भी भक्त इस खास मौके से पीछे नहीं रहना चाहता है.

बाबा काशी विश्वनाथ धाम

आज सावन का पहला सोमवार है इसलिए भगवान के मंदिर में सुबह साढ़े चार बजे ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने वाले भक्तों की लंबी लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश छत्ताद्वार होना है। बाबा के दर्शन को लगायी गयी बैरेकेडिंग देरशाम होते ही भक्तों की कतार से हाउसफुल हो गया। एक ओर गोदौलिया और दूसरी ओर नीचीबाग तक दर्शनार्थी डटे रहे। मंदिर परिसर बिल्व पत्र और फूलों की खूश्बू से आच्छादित रहा तो बाबा की भष्मी का सौंदर्य काशी में हर ओर दिखा। हर-हर महादेव से गंगा तट व काशी का कोना-कोना गुलजार है।

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रविवार को ही करीब 40 हजार कांवरियों ने बाबा का दर्शन किये। गंगा तट हो या शहर का कोई भी मार्ग हर ओर बस बोल-बम, बोल-बम का नारा बुलंद रहा। कांधे पर कांवर उठाये हजारों कांवरिये काशी में विचरण करते दिखे। नजर जिधर भी जाएं आंखे केशरीयामय हो जाती। कॉवरियों की उपस्थित से भोले की नगरी केशरिया रंग में ढ़ली दिखी। बाबा का दर्शन-पूजन करने के बाद नगर के विभिन्न शिवालयों में भी कांवरिये जल चढ़ाते दिखे। ज्यादातर कॉवरियों का जत्था पैदल ही काशी पहुंचा है। इनके साथ डीजे तो था लेकिन कानून के चलते मौन रहा।


बोल-बम के जयघोष के साथ नाचते कॉवरियों का दल आकर्षण का केन्द्र बना रहा। ट्रक, टै्रक्टर, जीप, साइकिल, बाइक आदि पर सवार हो कांवरियों का जत्था देररात तक काशी पहुंच रहा है। काशी से जुड़ने वाले सभी मार्ग पर कॉवरियों की आवाजाही से गुलजार रहे। रविवार को कैथी स्थित मार्कण्डेय महादेव, सारनाथ स्थित सारंग देव, रोहनिया स्थित शूलटंकेश्वर महादेव, मृत्युंजय महादेव, गौरी केदारेश्वर महादेव, तिलभाण्डेश्वर महादेव, बीएचयू स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर आदि शिवालयों में जलअर्पित करते दिखे।

अगस्त को सोमवार के दिन ही खत्म होगा सावन

वैद्यनाथ धाम, उज्जैन और वाराणसी की तरह देश के सभी बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में भोले के जयकारे गूंज रहे हैं. हरिद्वार में भी हजारों की तादाद में शिव भक्त कांवड़ लेने पहुंचे हैं. इस बार का सावन बेहद खास है. क्योंकि इस साल सावन सोमवार से शुरू हुआ है और सात अगस्त को सोमवार के दिन ही खत्म होगा और महीने भर भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहेंगे.

 सोमवार व्रत का आरंभ , न करें ये गलतियां, अधूरा रहेगा व्रत

सावन माह के पहले सोमवार व्रत का आरंभ हो चुका है। श्रावण मास में हर कोई शिव की कृपा पाना चाहता है। इसलिए इस बार पड़ रहे 5 सोमवार के व्रत भी उसके लिए बहुत महत्व रखते हैं। लेकिन सावन व्रत के दौरान कुछ गलतियां हैं जो आप अनजाने में कर बैठते हैं और फिर परिणाम भी भुगतना पड़ता है। इसलिए यदि शिव पूजा में पाप के भागी होने से बचना चाहते हैं तो नीचे बताई गई कुछ बातों को जानना आपके लिए जरूरी हो जाता है।

  • सोमवार का व्रत सूर्योदय से प्रारंभ कर गोधुली वेला यानि संध्या होने तक किया जाता है।
  • सुबह के समय दूध का इस्तेमाल शिवलिंग के रुद्राभिषेक के लिए करें लेकिन उसका इस्तेमाल स्वयं सेवन के लिए न करें।
  • संध्या के उपरांत परिवार समेत बैठकर शिव पूजा की कथा का श्रवण करें।
  • पूरे दिनभर के व्रत में एक समय सात्विक भोजन करें। भोजन से पहले शिव का ध्यान कर अपने परिवार के लिए कामना करें।
  • यदि दिनभर के व्रत में भूख लगे तो बीच-बीच में फलों का रस भी ले सकते हैं। यदि चाहें तो मूंगफली या मखाने का भी सेवन कर सकते हैं।