मानसिक विकास के लिए सहायक है खेल


आज की शिक्षा पद्धति छात्रों को तनावग्रस्त बना रही है, जिससे उनके मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास पर भी असर पड़ रहा है। इसका परिणाम यह होता है कि वे शारीरिक रूप से काफी दुबले-पतले होते हैं तथा मानसिक रूप से चिड़चिड़े व झुंझलाहट से भरे होते हैं। ऐसे में छात्रों को चाहिए कि वे पढ़ाई के साथ खेलों की ओर अग्रसर हों तथा इसे अपने लाइफस्टाइल का अभिन्न हिस्सा बनाएं। इससे न केवल वे फिट रहते हैं बल्कि, उनका चरित्र, व्यक्तित्व निखरता है, मानसिक क्षमता में भी बढ़ौतरी होती है। आत्मविश्वास झलकता है।

1) स्वस्थ हृदय-

दिल ज्यादा खून पंप करता है जिससे कार्डियोवस्कुलर सेहत बेहतर होती है। इनसे दिल का दौरा पडऩे और कार्डिएक बीमारियों का खतरा कम होता है।

2) मोटापा कम होता है-

जिस तरह का खाना बच्चे खाते हैं उसके कारण आजकल के बच्चों में मोटापा सबसे बड़ी समस्या है। उन्हें शारीरिक गतिविधियों में लगाने से वसा और कैलोरी बर्न करने में मदद मिलेगी। जो छात्र नियमित खिलाड़ी होते हैं वे दूसरों की तुलना में प्राकृतिक तौर पर ज्यादा तंदुरुस्त और सेहतमंद होते हैं।

3) रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि-

नियमित व्यायाम और खेलों में शामिल होना शरीर को बहुत सी बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी बनाता है। खेलने से स्टेमिना में बढ़ौतरी होती है, जिससे छोटी-मोटी कोई बीमारी परेशान नहीं करती। इसके अतिरिक्त शारीरिक मेहनत से पसीना बहता है जिससे हानिकारक पदार्थ बाहर निकलते हैं और शरीर स्वस्थ रहता है।

4) लंबा जीवन-

रिसर्च में ये बात सामने आई कि नियिमित रूप से व्यायाम या खेल खेलने वाले व्यक्ति की उम्र लंबी होती है। साथ ही वे प्रसन्नचित तथा आत्मविश्वास से भरे होते हैं।

5) हड्डियां मजबूत होती हैं-

खेलते समय शारीरिक रूप से काफी भागदौड़ करनी पड़ती है, जिससे जोड़ों में होने वाली परेशानी दूर होती है। इसके अलावा खेल हड्डियों की सघनता और मजबूती बनाए रखने में मदद करते हैं तथा ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका को कम करते हैं।

6) तनाव और अवसाद को कम करते हैं-

खेल हमारे शरीर में स्ट्रेस हार्मोंस के स्तर को कम करते हैं। ठीक इसी समय पर ये एंडॉर्फिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं, जो प्राकृतिक मूड लिफ्टर होते हैं और हमें तनाव एवं अवसाद से दूर रख सकते हैं।