शिवलिंग को तोड़ने पर भारी कीमत चुकानी पड़ी ब्रिटिशों को


भारत जैसे देश में लोग भगवान में बहुत आस्था रखते हैं और काफी विश्वास के साथ भगवान की पूजा-अर्चना भी करते है। हर धर्म के लोग अपने भगवान की पूजा करते है। साथ ही हमारे देश में कई तरह के भगवान की पूजा भी की जाती है। जैसे की आप सब जानते ही हैं कि लोगों की सोच के जरिए भगवान शिव को सबसे बड़ा भगवान माना जाता है।

हालंाकि भगवानों में बड़ा और छोटा नहीं होता है। लेकिन फिर भी लोगों का यही मानना है। इसलिए आज हर व्यक्ति भगवान शिव की ज्यादा लोग शिवलिंग के रूप में पूजा करते है। अक्सर ऐसा कहा भी जाता है कि शिवलिंग में भगवान शिव का वाश करते हैं। जो लोग इन सब बतों को मजाक में लेते है। उनको आज हम कुछ ऐसी बाते बताने जा रहें हैं जिसे सुनकर आप भगवान पर विश्वास करेंगे।

यह घटना लगभग 150 वर्ष पुरानी है, जो झारखंड में तक़रीबन 150 वर्ष पहले घटित हुई थी। उस समय ब्रिटेन देश का भारत पर कब्जा था। तब ब्रिटिश झारखंड में रेलवे लाइन बना रहे थे। उस समय कोलकत्ता से मुंबई के लिए रेलवे लाइन की खुदाई चल रही थी की तभी खुदाई करते समय वहां शिवलिंग मिला।

शिवलिंग को देखते ही वहां खुदाई का काम रोक दिया गया। विदेशी इंजीनियर रोबर्ट हेनरी ने 18 महीने बाद फिर से खुदाई करने के लिए कहा। जिसमें भारतीय मजदूरों ने इस पवित्र जगह पर खुदाई करने से साफ़ इंकार कर दिया। क्योंकि भारतीय मजदूर इन 18 महीनों में इस शिवलिंग से इस तरह श्रद्धा और भक्ति बना चुके थे, जैसे की कोई मां और संतान। जिसकी वजह से ब्रिटिश इंजीनियर रोबर्ट हेनरी ने फावड़े से इस शिवलिंग को खंडित कर दिया।

जिसके बाद से ही ब्रिटिश इंजीनियर रोबर्ट को इस तरह की सजा मिली जिसे वह कभी सपनों में भी नहीं सोच सकते थे। उस वक्त रास्ते से आते समय एक रोबर्ट की मृत्यु हो गई। इस घटना को जैसे ही ब्रिटिशों ने देखा तो उन्होंने तुरंत ही रेलवे की लाइन बदल ली। तब से लेकर आज तक शिवलिंग की पूजा की जाती है। जिसका आज के समय में झारखंड में एक शिव का बड़ा मंदिर बना हुआ है।

प्राचीन शिवलिंग झारखंड में महादेवशाल मंदिर के रूप में स्थापित है। उस जगह पर शिवलिंग के दोनों टुकड़े जिनका अपमान किया गया था। उन्हीं टुकड़ों की आज अलग-अलग पूजा पूरी श्रद्घा के साथ की जाती है।