ये 181 साल का बुजुर्ग मांग रहा है यमराज से अपनी ही मृत्यु की दुआ, जानिए क्यों


दुनिया का एक बड़ा सत्य है जिसने इस पृथ्वी पर जन्म लिया है उसे एक दिन मरना ही है। उसे अपने प्राणों का एक दिन त्यागना ही होता है। जिस तरह इंसान का जन्म भगवान की मर्जी से नहीं होता है उसी तरह किसकी भी मौत भगवान की मर्जी के बिना नहीं आती है। ऐसा भी कहा जाता है कि जिसकी मौत जब आनी होती है तब आ जाती है वह किसी के भरोसे नहीं रहती है। जिसने जिस समय भगवान के पास जाना होता है वह उस समय चला जाता है।

दुनिया में कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अपने मौत की भीख भगवान से मांग रहे होते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताएंगे जो भगवान से अपनी मौत की भीख मांग रहा है। हमारे घर के आस-पास के काफी सारे ऐसे बुजुर्ग होते हैं। जब हम इंसान की उम्र की बात करते हैं तो सबसे ज्यादा उम्र 100 साल होती है किसी भी इंसान के लिए।

आज की जो पीढ़ी है वह 70 साल की उम्र तक आते-आते दम ही तोड़ देती है। अगर हम आपको बताएं कि एक ऐसे भी बुजुर्ग हैं जो 181 साल से जीवित हैं। वह सदियों से अपनी मौत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। लोगों कहा कहना है कि मौत ने इनके घर का रास्ता ही भूला दिया है।

यह बुजुर्ग वाराणसी में रहते हैं और इनका नाम है महाष्टा मुरासी जो सालों से अपनी मौत की राह देख रहे हैं। वह अपनी जिंदगी से इतने दुखी हो चुके हैं कि पूरा दिन वह अपनी मौत को याद करते रहते हैं। यह कहते हैं कि मौत ने इनके घर के रास्ते को भूला दिया है।

बता दें कि इन बुजुर्ग का जन्म 1835 में कर्नाटक के बंगालुरु में हुआ था। बचपन से ही वह वहीं पर ही रहे थे। साल 1903 में वह वाराणसी में हमेशा के लिए रहने के लिए चले गए थे। महाष्टा बताते हैं उन्होंने अपना पेट पालने के लिए 122 की उम्र तक मोची का काम किया था।

फिर उन्होंने 1957 में वह काम को बंद कर दिया था। महाष्टा की उम्र को कई लोग अभिशाप मानते हैं तो वहीं कई ऐसे लोग भी हैं जो उनकी उम्र को कुदरत का करिश्मा मानते हैं। आपको बता दें कि महष्टा की उम्र एक पहेली बन कर रह गई है।

बहुत से डॉक्टर्स ने उनकी सही उम्र जानने के लिए बहुत कोशिश की थी लेकिन वह सब अपनी उस कोशिश में नाकाम हो गए। कई सरकारी कर्मचारियों ने भी महाष्टा जन्म को लेकर प्रमाण पत्र बनाने की कोशिश की थी पर उनकी सही आयु के बारे में नहीं पता होने से वह नहीं बना पाए।