क्या आप पहाड़ों के दिल शिमला के ‘शिमला’ शब्द की उत्पत्ति का राज जानते हैं, आइए जाने !


शिमला को आप जानते ही हैं, जहां खूबसूरत वादियों के साथ-साथ ठंड़ी-ठंडी हवाओं का लुफ्त लेने पर्यटकों का तांता लगा रहता है। यह अपने देश का ही एक प्रसिद्ध और खूबसूरत पर्यटक स्थल है पर बहुत कम लोग जानते हैं कि इस पर्यटक स्थल का नाम एक हिन्दू देवी के नाम पर ही पड़ा है आज हम आपको उस देवी और उसके बने एक प्राचीन मंदिर काली बाड़ी के बारे में ही जानकारी देने जा रहें हैं। आइये जानते हैं देवी काली बाड़ी के मंदिर और शिमला शब्द की उत्पत्ति के बारे में।

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शिमला शब्द की उत्पत्ति का कारण है शिमला में स्थित “काली बाड़ी मंदिर”, इस मंदिर को कुछ बंगाली काली भक्तों द्वारा 1845 में बनवाया गया था। असल में इस मंदिर का निर्माण कार्य 1823 में ही शुरू हो गया था। काली बाड़ी मंदिर के पास में उस समय के दस्तावेज आज भी मौजूद हैं। जिनके अनुसार उस समय पर इस मंदिर में लगी मूर्ति की ऊंचाई 4 फीट थी।

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इस प्रकार हुई शिमला शब्द की उत्पत्ति –

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असल में यह मंदिर “देवी श्यामला” का मंदिर है और शिमला शब्द भी इसी श्यामला शब्द का ही व्युत्पन्न माना जाता है। इस प्रकार से यह श्यामल शब्द ही शिमला का असल उत्पत्तिकारक माना जाता है। श्यामला देवी को ही मां काली माना जाता है। इस मंदिर में उनकी ही एक लकड़ी की मूर्ति लगी हुई है और दीपावली, दुर्गापूजा तथा नवरात्री जैसे अवसरों पर इस मंदिर में भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है।

ये है काली बाड़ी मंदिर का प्राचीन इतिहास –

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यह मंदिर काफी प्राचीन है, यह पूर्वकाल में जाखू हिल पर मौजूद था पर अब जिस जगह पर है उस स्थान पर इसको अंग्रजों ने अपने कार्यकाल में शिफ्ट करा दिया था। वर्तमान में यह स्कैंडल प्वाइंट से जनरल पोस्ट ऑफिस के कुछ ही दूरी पर स्थित है। अब इस मंदिर में भी पहले की प्राचीन मूर्ति की जगह काफी आकर्षक और कुछ छोटी मूर्ति स्थापित करा दी गई, जो की चंडी देवी की है।

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ब्रिटिश हुकूमत के समय में जब शाम को यहां पर आरती हुआ करती थी तब अंग्रेज अफसर उस दौरान काफी शोरगुल होने की शिकायत करते थे पर मंदिर के पुजारी उनको यह कह देते थे कि युद्ध में अंग्रजों की जीत के लिए वे यहां पर प्रार्थना करते हैं। इस प्रकार से यहां निरंतर बिना विघ्न के पूजा होती रहती थी और अंग्रेज परेशान नहीं करते थे। आज भी यह मंदिर उस पुराने इतिहास का शिमला में एकमात्र साक्षी है।

काली बाड़ी माँ का महत्त्व :

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काली बाड़ी माँ के भगत माँ के दर्शन के लिए हमेशा सज्ज रहते है। उनका मानना है कि माँ उनके जीवन मे खुशाहाली लाती है । नवरात्रि और दिवाली के समय मंदिर मे बहुत ज्यादा श्रद्धालु आते है।

मंदिर खुलने और बंद होने का समय :
गर्मियों में 4:45 सुबह से 10 रात्रि
सर्दियों मे 5:45 सुबह से 9 रात्रि(दिन में भी कुछ घंटों के लिए मंदिर बंद रहता है)


काली बाड़ी मंदिर पहुंचने का रास्ता :
शिमला बस स्टैंड से मंदिर के लिए 15 मिनट का पैदल रास्ता है l मंदिर के साथ एक बहुत सुंदर सा शिव मंदिर भी है l वहा पर शिव लिंग को स्थापित किया गया है