इजरायली पर्यटकों की पहली पसंद कसोल गांव, यहां भारतीय पुरूषों पर है बैन!


हिमाचल के कसोल गांव को इजराइल से आने वाले टूरिस्ट की पहली पसंद हैं। इजरायल में अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण लेने के बाद इजरायली नागरिक इस गांव में भारी संख्या में आते हैं। ऐसा लगता है मानों यह कोई इजरायल का ही गांव हो। भारतीय पुरुषों के इस गांव में आने पर बैन है। यदि आ भी जाएं तो लोकल लोग उन्हें ठहरने के लिए किराए पर कमरे ही नहीं देते हैं।

Source

क्यों बैन हैं भारतीय पुरूष पर 

इस क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भरतीय पुरूषों को इलाके में नहीं आने देते। उनका कहना है कि यहां आने वाले भारतीय पुरूष इजरायली महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं तथा उनकी मस्ती में खलल डालते हैं। कोई भारतीय पुरूष यदि पर्यटक बनकर इलाके में आता है तो उसे किराए पर कमरा ही नहीं दिया जाता है।

इजरायलियों की पसंद है कसोल का ये गांव

Source

 

इजरायल के नागरिकों का दावा है कि उन्होंने करीब दो दशक पहले कसोल गांव को खोजा था। घरेलू पर्यटकों की मनाली में संख्या बढऩे के बाद जब मनाली अपना प्राकृतिक रूप खोने लगा तो इजरायली टूरिस्ट एकांत स्थल ढूंढने के लिए पार्वती घाटी के किनारे बसे गांव कसोल की ओर रूख करने लगे।

स्थानीय लोगों का रोजगार कसोल का ये गांव


इस गांव में ड्रग्सए मस्ती और चैन का पूरा वक्त मिलने की वजह से यहां सैलानियों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। इस क्षेत्र के आस.पास के गांवों में इजरायली झंडे नजर आते हैं। शुरुआत में इजरायली कसोल आए तो उन्होंने जगह किराए पर लीं। उन्होंने अपने गेस्ट हाउसए कैफे चलाए। स्थानीय लोगों ने उन्हें अपनी जगहें दीए क्योंकि उन्हें यकीन था कि इससे वहां रोजगार के साधन पैदा होंगे।

गांव में बोली जाती है हिब्रू भाषा

Source

यहां के इंटरनेट कैफे में बातचीत की भाषा हिब्रू है। इजरायली ज्यादा अंग्रेजी नहीं समझते हैं। स्थानीय लोग इजरायलियों के लिए बने कैफे में नहीं जाते। उनका कहना है कि इजरायलियों का खाना अलग तरह का है। कसोल गांव में एक भी गाड़ी नहीं थी। अब लोग अपने खुद के कैफेए गेस्ट हाउस चलाने लगे हैं। तीन सौ रुपए रोजाना किराया पर यहां कमरे मिल जाते हैं।

Source

गांव के लोगों ने खुद को इजरायलियों के मुताबिक ही ढाल लिया है। हम्मसए पिटा ब्रेड लोगों के मुख्य भोजन बन गए हैं। खबद हाउस यानी यहूदियों का सांस्कृतिक स्थल भी दिखता है इस खूबसूरत इमारत में लकड़ी के फर्श और बेंच हैं। एक युवा रब्बी ;यहूदी पुजारीद्ध को यहां इजरायल से भेजा गया गया हैए जो यहूदियों की पूजा करने में मदद करता है।