हमारे ऐसे पसंदीदा व्यंजन जिन्हें हम अपना मानते है पर है वो विदेशी


Samosa

भारत देश अपनी कला और संस्कृति के अलावा अपने अनोखे खान पान के लिए भी काफी मशहूर है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आपको अलग अलग स्वाद के पकवानों की लम्बी लिस्ट मिल जाएगी। पंजाबी खाना हो या फिर साउथ इंडियन हर किसी व्यंजन का अपना ख़ास अंदाज़ है।

दुनिया भर के पर्यटक न सिर्फ भारत में घूमने आते है बल्कि इन लज़ीज़ व्यंजनों का मजा लेने भी आते है। आज हम आपको कुछ ऐसे स्नैक्स के बारे में बता रहे है जिनके बारे में बहुत से भारत वासियों को शायद यही लगता होगा की ये डिशेस भारत की खोज है पर आपको बता दें की ये सभी विदेशी है लेकिन भारत में ऐसी रम गयी है की हमारी रोज की जिंदगी का हिस्सा बन गयी है।

Samosaसमोसा : भारत के गांवों से लेकर शहरों तक आपको समोसे के स्टाफ और दुकानें मिल जाएँगी और आपको भी ये लग सकता है की समोसा एक पारम्परिक भारतीय पकवान होगा पर ऐसा नहीं है। ये पहली बार 10वीं सदी में बना था। इसमें पहले आलू नहीं मांस और मसाले भरे जाते थे। मध्य पूर्व के कुछ व्यापारी इंडिया आए तो अपने साथ खाने का ये आइटम ले आए।

Jalebi - a sweetजलेबी : जलेबी का इतिहास भी भारत के व्यंजनों की लिस्ट में काफी पुराना है पर आपको बता दें की जलेभी भी भारत की देन है। इसका जन्म भी मध्य पूर्व में हुआ था। इसे अरबी भाषा में जबाया और फारसी भाषा में जलीबिया कहा जाता था। हिंदुस्तान ने इसे न सिर्फ अपनाया बल्कि बेशुमार प्यार दिया। जलेबी पर सबसे पहला हक तुर्की और ग्रीस का है।

sweet dishगुलाब जामुन : ये मिठाई भारत में गर्म और ठंडी दोनों तौर पर बेहद पसंद की जाती है पर भारत में भले ही ये सबसे ज्यादा बिकने वाली मिठाई हो पर है ये भी विदेशी। ये भूमध्य और फारस में पहली बार बनाई गई थी। वहां इसे लुकमत अल कबीडी कहा जाता था। उस वक्त आटे की बनी गेंदों को शहद की चटनी में भिगोया जाता था और चीनी छिड़क कर पेश किया जाता था।

Teaचाय : भारत में कितने ही ऐसे लोग होंगे जिनकी दिन की शुरुआत ही चाय के कप से होती है पर आपको बता दें की बरसों से भारतीयों के जीवन का अहम् हिस्सा बन चुकी चाय भी चीन की देन है। चीन के लोग इसे औषधीय पेय के तौर पर इस्तेमाल किया करते थे। ब्रिटैन वालों ने भारत के लोगों को चाय उगाने की तकनीक सिखाई, तब से चाय हमारे यहां ही फल फूल रही है।