पहली बार ब्रेल लिपि और हिन्दी में पुस्तकें छपीं

0
32

नयी दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) ने स्कूली शिक्षा को समावेशी बनाने के वास्ते विकलांग बच्चों के लिए हिन्दी के साथ-साथ ब्रेल लिपि में ऐसी पुस्तकें प्रकाशित की हैं जिन्हें सामान्य बच्चे भी साथ-साथ पढ़ सकते हैं।

एनसीईआरटी के निदेशक हृषिकेश सेनापति और विशेष आवश्यकता समूह विभाग की अध्यक्ष प्रो अनुपम आहूजा ने आज यहां पत्रकारों को बताया कि पहली और दूसरी कक्षा के छात्रों के लिए ‘सबके लिए पुस्तक’ श्रृंखला के तहत 40 पुस्तकें प्रकाशित की गयी हैं जिन्हें नेत्रहीन मूक बधिर एवं अन्य तरह के विकलांग बच्चे सामान्य बच्चों के साथ-साथ पढ़ सकते हैं। ये पुस्तकें ‘बरखा श्रृंखला’ के तहत प्रकाशित की गयी हैं।

इन किताबों का डिजिटल फॉर्म भी एनसीआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है और वे मुफ्त डाउन लोड की जा सकती हैं। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने गत दिनों इन पुस्तकों का विमोचन किया था। उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों का बारकोड युक्त एक कार्ड भी बनाया गया है जिसे अपने मोबाइल फोन में भी डाउनलोड किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मूक बधिर बच्चों के लिए सांकेतिक भाषा में भी पुस्तकें लाई जायेंगी।

उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए पहली बार यह अभिनव प्रयोग किया गया है ताकि विकलांग बच्चे स्कूलों में सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई कर सकें। उन्होंने कहा कि विकलांगता संसोधन कानून 2016 के अनुसार विकलांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ-साथ पढ़ाना अनिवार्य है।

दोनों अधिकारियों ने कहा कि पहले विकलांग बच्चों के लिए अलग स्कूल या अलग किताबें होती थी लेकिन इस अलगाव से उनका सामान्य बच्चों के साथ मेलजोल नहीं हो पता था लेकिन अब विकलांग और सामान्य बच्चे एक साथ ही ये पुस्तकें पढ़ सकेंगे जिससे भेदभाव दूर हो सकेगा और सामान्य बच्चे विकलांग बच्चों के साथ संवेदनशील हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को इन किताबों से परिचित कराया गया है ताकि वे अपने स्कूलों के लिए इस तरह की किताबें छाप सकें। उन्होंने कहा कि स्कूलों में विकलांग एवं सामान्य बच्चों की अलाद्ग अलग श्रेणी नहीं होने चाहिए बल्कि दोनों तरह के बच्चे सामान्य स्पर्धा में भाग ले सकें।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि ये पुस्तकें डेढ़ साल की मेहनत के बाद तैयार की गयी हैं और इन किताबों पर किस तरह की प्रतिक्रिया आती है उसके बाद ही उच्च वर्ग की कक्षा के लिए किताबें छपी जायेंगी और भविष्य में पाठ्य-पुस्तकें भी छापी जा सकती हैं।

(वार्ता)

LEAVE A REPLY