जामिया में सरकार या संघ का दखल नहीं : कुलपति

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नई दिल्ली : जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. तलत अहमद ने जामिया में किसी प्रकार के सरकारी या संघ परिवार के दबाव से इनकार करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कुछ दूसरे दर्जे के नेता ही विवाद खड़ा करते है, बड़े नेता समझदार हैं।
श्री अहमद ने एक अख़बार को दिये साक्षात्कार में विश्वविद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों और पिछले दिनों वहां तीन तला़क संबंधी आयोजन रद्द किये जाने से उठे विवाद पर कहा कि जामिया हिंदुस्तान से बाहर तो नहीं है जो चीत्र सरे हिंदुस्तान में होगी वह वहां भी होगी।
उन्होंने कहा कि जिन विषयों पर संगोष्ठी से विवाद खड़ा होता हो उस पर आयोजन विश्वविद्यालय परिसर से बाहर किया जाना चाहिए। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने अभिव्यक्ति की आत्रादी का दुरूपयोग करके मीडिया में वह बात कहीं जो सच थीं ही नहीं।
वह शुरू में चुप रही पर रामजस कॉलेज के हंगामे के बाद बोली। दरअसल विश्वविद्यालय का हॉल तीन तला़क विषय के लिए बुक नहीं हुआ था। आयोजकों ने सेमिनार का विषय बदल दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सेमिनार जामिया या अलीगढ़ में ही क्यों हो,आप प्रेस क्लब में जाकर सेमिनार कराएं। उन्होंने कहा, संघ के लोग उनके पास कभी नहीं आये। संघ के लोगों से मेरी भी जान पहचान है। उनसे मेरी बात होती रहती है। उनमें कई लोग बहुत अच्छे हैं। उनके विचार बहुत अच्छे हैं। केवल छुटभैये नेता विवाद करने की कोशिश करते हैं। वे ही सबसे अधिक हल्ला करते हैं।
जो बड़े लोग है वे समझते है कि क्या समस्याएं हो सकती है। वे दबाव नहीं डालते कि आपको यह करना ही पड़ेगा।Þ श्री अहमद ने विश्वविद्यालयों में गैर शिक्षकों को कुलपति बनाये जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी आईपीएस या सेना के लोगों को विश्वविद्यालयों का कुलपति नहीं बनाया जाना चाहिए। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, जामिया को रैंकिंग का हक नहीं मिला जिसकी वह हकदार है। इतनी पुरानी यूनिवर्सिटी को अब जाकर नैक का प्रमाणपत्र मिला। जेएनयू शोध केंद्रित विश्वविद्यालय है अब हम जमिया में भी इस पर ध्यान दे रहें है और डीन रिसर्च पद भी बनाया। आपदा प्रबंधन से लेकर जलवायु परिवर्तन पर भी ध्यान दे रहे हैं।

– वार्ता

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