डेंगू और चिकनगुनिया ने दे दी है दस्तक

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मच्छरों से फैलने वाली चिकनगुनिया और डेंगू जैसी बीमारियां आमतौर पर बरसाती मौसम में होती हैं लेकिन इस वर्ष इन्होंने जल्दी दस्तक दे दी है। विशेषज्ञ इसे लेकर चिंतित तो हैं पर इसे असामान्य नहीं मानते। ये बीमारियां मादा एडीस मच्छरों द्वारा फैलाई जाती हैं, जो साफ पानी में पलते हैं। बरसात के पानी के साथ, लगातार होने वाले निर्माण कार्य, छतों पर खुली पानी की टंकियां और कूड़े के ढेर भी इनकी पैदाइश के लिए अनुकूल माहौल पैदा करते हैं। एडीस मच्छर का जीवनकाल लगभग एक सप्ताह का होता है।

इसमें ये तीन बार प्रजनन करते हैं और एक बार में करीब 100 अंडे देते हैं। ये अंडे खुश्क मौसम में नौ महीने तक सुप्त अवस्था में रह सकते हैं और अनुकूल माहौल मिलने पर फिर सक्रिय हो सकते हैं। चिकनगुनिया और डेंगू के वायरस वाले मच्छर जिन लोगों को काटते हैं, वो उनके वाहक बन जाते हैं और जब मच्छर उस व्यक्ति को काटता है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। इस तरह यह बीमारी आगे बढ़ती जाती है। चूंकि एडीज मच्छरों के अंडे लंबे समय तक सुप्त अवस्था में रहते हैं, जिसे देखते हुए ये जरूरी है कि इनसे बचाव के लिए उपाय पूरे साल किए जाने चाहिए। मसलन- शरीर को ढक कर रखें। मच्छर मारने वाली दवाई, स्प्रे या क्रीम का प्रयोग करें।

छत पर रखी टंकियों, निर्माणाधीन भवनों के टैंकों को समय-समय पर साफ करें। पानी की सभी टंकियों और बर्तनों को ढक कर रखें ताकि उनमें मच्छर न पैदा हो सकें तथा कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें। आसपास के इलाके को साफ रखें और जल-मल निकासी की व्यवस्था को दुरूस्त रखें। प्रशासनिक स्तर पर मच्छर प्रजनन पर पूरे साल निगाह रखी जानी चाहिए ताकि पता रहे कि ये बीमारियां फैलाने वाले मच्छर कहां-कहां पल रहे हैं।

लक्षण और इलाज
डेंगू और चिकनगुनिया एक वाइरल बीमारी है, जिनमें प्रमुख लक्षण ठंड लगकर बुखार आना, जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, कमजोरी महसूस होना, जी मचलना, त्वचा पर लाल चकत्ते पडऩा आदि हैं।

चूंकि डेंगू और चिकनगुनिया में फ्लू जैसा बुखार होता है। कुछ मामलों में ब्लड प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होती है, इसलिए बुखार होने पर खून की जांच आवश्यक है, ताकि समय रहते ब्लड प्लेटलेट्स की भरपाई की जा सके। हालांकि इसके इलाज के लिए कोई एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है लेकिन कुछ दवाएं दर्द और बुखार कम करने में सहायक अवश्य होती हैं।

इन वायरल से ग्रसित होने पर ज्यादा से ज्यादा द्रव्य पदार्थ और पानी लें, ज्यादा से ज्यादा आराम करें और नॉन-एस्प्रिन दर्द निवारक दवा लें। पीडि़त व्यक्ति को पौष्टिक भोजन दें, जिसमें सभी आवश्यक तत्व मौजूद हों। समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहें तथा कुछ घरेलू उपाय जैसे बकरी का दूध व पपीते के पत्ते का रस पिएं। घबराएं बिल्कुल नहीं, क्योंकि अगर आप पर्याप्त एहतिहात बरतते हैं तो जल्द ही इस बीमारी को दूर भगा सकते हैं।

(ललिता निझावन)

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