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बटाला विस्फोट के बाद बृहस्पतिवार को भी राहत एवं बचाव कार्य जारी , पंजाब पुलिस ने फैक्टरी को बताया अवैध

बटाला (पंजाब) : पटाखे की फैक्टरी में भीषण विस्फोट के बाद यहां के सरकारी अस्पताल में तनाव चरम पर है। वहीं पंजाब पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि जिस पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ था, वह अवैध है। 

गुरदासपुर जिले के बटाला स्थित पटाखा फैक्टरी में बुधवार को हुए विस्फोट में 23 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस विस्फोट के बाद बृहस्पतिवार को भी राहत एवं बचाव कार्य जारी है। यह फैक्टरी घरों और दुकानों के बीच स्थित थी। 

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम मलबे में खोज कर रही है ताकि यदि कोई व्यक्ति वहां अब भी फंसा हुआ है, तो उसे बचाया जा सके। 

बटाला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ओपिंदरजीत सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘फैक्टरी अवैध रूप से चल रही थी। मुझे इसके बारे में पहले पता नहीं चला, अन्यथा इसे बंद कर दिया जाता।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘अब हम बटाला शहर में सभी फैक्टरियों के लाइसेंसों की जांच कर रहे हैं।’’ 

इस बीच, सिविल अस्पताल में कुछ पीड़ित परिवारों ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि फैक्टरी बंद करने का बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद इसे बंद नहीं कराया गया। 

उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ भी नारेबाजी की। उन्होंने जालंधर रोड पर घनी आबादी वाली गुरु राम दास कॉलोनी में अवैध रूप से फैक्टरी चलाने की अनुमति देने के लिए शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किए जाने की भी मांग की। 

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘‘अब सरकार क्या जांच करेगी... अवैध रूप से फैक्टरी चलाने की अनुमति देने के लिए शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।’’ 

पंजाब सरकार ने विस्फोट की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। गुरदासपुर जिले के बटाला में जालंधर रोड पर स्थित इस पटाखा फैक्टरी में शाम करीब चार बजे विस्फोट हुआ था। 

स्थानीय निवासियों ने बताया कि विस्फोट से आसपास के मकानों को काफी नुकसान पहुंचा है, कुछ की छतें भी गिर गई हैं। विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गयी। 

उन्होंने दावा किया कि इस फैक्टरी में 2017 में भी विस्फोट हुआ था जिसके बाद स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में शिकायत देकर इसे बंद करने का अनुरोध किया था, लेकिन प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

बुधवार को हुए विस्फोट के पीड़ितों में फैक्टरी के कर्मचारी, फैक्टरी मालिक के परिवार के सदस्य और कुछ राहगीर शामिल थे। 

अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट में फैक्टरी के कर्मचारियों, फैक्टरी मालिक के परिजनों और राहगीरों की मौत हुई है। गंभीर रूप से घायल सात लोगों को अमृतसर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। 

स्थानीय निवासियों ने बताया कि फैक्टरी के पहले मालिक सतनाम सिंह की मौत के बाद इसे चार हिस्सों में बांटा गया जो उनके बेटे जसपाल सिंह, परमजीत सिंह, हरभजन सिंह और राविल सिंह चलाते हैं। 

पुलिस ने कहा कि सतनाम सिंह के पास फैक्टरी चलाने का परमिट था। उनकी मौत के बाद प्रशासन ने इसका नवीकरण नहीं किया। 

मालिकों को जानने वाले बलजीत सिंह ने कहा कि उत्पादन इकाई एवं दुकानें आगे थीं जबकि पिछले हिस्से में परिवार रहते थे। 

उन्होंने कहा कि मालिकों ने दशहरा, गुरपुरब और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले काफी मात्रा में कच्ची सामग्रियां एकत्रित की थीं और पटाखे न केवल पंजाब बल्कि हिमाचल प्रदेश में भी भेजे जाते थे। 

स्थानीय निवासियों ने बताया कि 2017 के विस्फोट के बाद मालिकों ने फैक्टरी को कहीं और ले जाने और व्यस्त बाजार में केवल कार्यालय रखने पर सहमति जताई थी। यहां एक गुरुद्वारा, एक मंदिर और एक निजी स्कूल भी है। 

उन्होंने कहा कि लेकिन कुछ महीने बाद ही इस इलाके में फिर से पटाखे बनाए जाने लगे। इसी इलाके में रहने वाले बटाला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रघुबीर सिंह संधू ने कहा कि उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

गुरदासपुर के उपायुक्त विपुल उज्ज्वल ने कहा कि अभी तक 19 शवों की पहचान हुई है। मृतकों में पांच फैक्टरी मालिक के परिजन थे। उनकी पहचान सुरिंदर सिंह, परमजीत सिंह, ओंकार सिंह, विक्रमजीत सिंह और राजिंदरपाल सिंह के तौर पर हुई है। 

11 अन्य मृतक फैक्टरी में काम करते थे। पुलिस ने उनकी पहचान शामलाल, मुखा, बलकार सिंह, लाखा सिंह, बलकार, तरलोक सिंह, सोनू, मनप्रीत सिंह, आलिया, विनय और लल्ली के रूप में की है। 

विस्फोट में तीन स्थानीय निवासी बिमला रानी, रमनदीप कौर और पाहुलप्रीत सिंह की भी मौत हो गई। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजन के लिए दो लाख रुपये की मुआवजा राशि और गंभीर रूप से जख्मी सात लोगों के परिजन के लिए 50 - 50 हजार रुपये मुआवजा राशि की घोषणा की है। 

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने बृहस्पतिवार को पंजाब सरकार से अपील की कि हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएं। 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर किसी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की जाती है तो इस तरह की घटनाएं भविष्य में भी होंगी।’’