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कृषि कानूनों पर पंजाब इकाई से केंद्र को मिली गलत जानकारी, कारण बताओ नोटिस मिलने पर बोले पूर्व मंत्री

केंद्र के कृषि कानूनों पर काफी बवाल हुआ और अभी भी इस पर हंगामा जारी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री अनिल जोशी ने एक बड़ा बयान दिया है। जोशी ने बुधवार को पार्टी की राज्य इकाई की आलोचना की और कहा कि उसने कृषि कानूनों पर केन्द्र को सही फीडबैक नहीं दिया।

बता दें कि पंजाब इकाई ने एक दिन पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते उन्हें कारण बताओं नोटिस जारी किया गया था। जोशी ने दावा किया कि आरंभ में कृषि कानून का विरोध कर रहे किसानों की कुछ ही मांगे थीं और अगर भाजपा की पंजाब इकाई ने ऐसा नहीं दिखाया होता कि राज्य में सब ठीक है, तो उन्हें संभाला जा सकता था।
उन्होंने कहा कि भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष अश्विनी शर्मा को अपनी नाकामी स्वीकार करनी चाहिए और उन्हें नोटिस जारी करने के बजाए खुद इस्तीफा देना चाहिए। जोशी ने अमृतसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा,‘‘ राज्य इकाई (भाजपा की) ऐसा फीडबैक दे रही थी(केन्द्र को) कि किसान प्रसन्न हैं और केवल कुछ लोग हैं जो असंतुष्ट हैं। जब केन्द्रीय मंत्रियों ने ऑनलाइन बैठक की तो उन्होंने बैठकों में फर्जी किसान पेश किए और दावा किया कि वे कानूनों से प्रसन्न हैं।’’
पूर्व मंत्री ने कहा,‘‘ अश्विनी शर्मा की अगुवाई वाली इकाई ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से यह झूठ बोला कि उन्होंने कार्यक्रम आयोजित करके गांवों में किसानों को कृषि कानूनों के फायदों के बारे में समझा दिया है,जबकि सच्चाई यह है कि इन कानूनों के खिलाफ किसान टोल अवरोधकों और रेल पटरियों पर बैठे थे।’’

उन्होंने कहा कि आरंभ में प्रदर्शन कर रहे किसानों की केवल कुछ ही मांगे थीं और ‘‘ये मांगे इतनी बड़ी नहीं थीं,जिनसे तालमेल नहीं बैठाया जा सके। पंजाब में पहले ही गेहूं और धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर होती है, वहीं विवाद के मामले में उच्च अदालतों में जाने के प्रावधानों पर भी सहमति बन सकती थी।’’ जोशी ने कहा कि मुद्दे को पंजाब भर ही में सीमित रख कर राज्य में ही इसे हल किया जा सकता था। इसे दिल्ली की सीमाओं पर, देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचने से रोका जा सकता था।
उन्होंने कहा कि शर्मा को ‘‘अपनी नाकामी स्वीकार करके मुझे नोटिस जारी करने के बजाए इस्तीफा दे देना चाहिए।’’उन्होंने कहा,‘‘ प्रदर्शनों में 500 से अधिक किसानों की जाने गईं लेकिन उन्होंने (भाजपा की राज्य इकाई) कभी कुछ नहीं कहा। कांग्रेस,शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी ने किसानों को अपना समर्थन दिया। भाजपा की पंजाब इकाई किसानों के समर्थन में क्यों नहीं खड़ी हुई? हम कह सकते थे कि केन्द्र कोई भी निर्णय ले, हम किसानों के साथ है।’’