लुधियाना-अमृतसर : जलियावाले बाग नरसंहार को 100 साल पूरे होने पर रखे गए शहीदी समागम के अवसर पर अमृतसर में विशेष तौर पर शिरकत करने पहुंचे देश के उपराष्ट्रपति श्री वेंकेया नायडू ने शहीदों को श्रद्धांजलि भेंट करते हुए उनकी याद में एक सिक्का और टिकट भी जारी किया। जलियावाले बाग के शहीदी शताब्दी समागम के अवसर पर बीएसएफ के जवानों की टीम ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

अपने टिवटर अकाउंड के जरिए श्री नायडू ने कहा कि जलियांवाले बाग को याद करते है कि हमें आजादी अनेक ही बलिदानों के पश्चात हासिल हुई है। उन्होंने कहा कि देशवासियों को चाहिए कि वे 1919 के शहीदों को 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि जरूर दें। उन्होंने यह भी कहा कि जलियांवाले बाग का नरसंहार अंग्रेज सरकार के कफन पर आखिरी कील साबित हुआ था और जलियांवाले बाग के कांड को सौ बरस बीत जाने के बावजूद इस की पीड़ा आज भी महसूस की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जलियांवाले बाग की घटना मानवता के आदर्श साहस की याद करवाता है। क्योंकि लोगों ने जबर का मुकाबला सब्र के साथ करते हुए शांति का परचम बुलंद रखा। हमें आजादी अनेक बलिदानों के बाद मिली है।

जलियांवाले बाग के नरसंहार की 100वीं बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राहुल गांधी

इस दौरान पंजाब के राज्यपाल बीपी सिंह बदनौर के अलावा पंजाब के शिक्षा मंत्री ओमप्रकाश सोनी, भाजपा के पंजाब प्रधान श्वेत मलिक भी मोजूद थे। इस अवसर पर धार्मिक कीर्तन भी करवाया गया।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद व जल्लियाँवाला बाग के ट्रस्टी श्वेत मलिक ने अन्य के साथ श्रद्धांजलि दी। उन्होंने जलियांवाला बाग के निर्मम निर्दोष लोगों के हत्याकांड की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत के इतिहास में जलियांवाला बाग का निर्मम हत्याकांड को याद कर कोई भी पत्थर दिल इंसान सहम जाता है।

13 अप्रैल 1919 का वह दिन किसी भी भारतीय के लिए न भूलने वाला दिन है। इस दिन जलियांवाला बाग में उस दिन अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाये गए रोलट एक्ट के खिलाफ विरोध कर रहे निहत्थे भारतीय प्रदर्शनकारियों पर अंग्रेजी सेना की एक टुक ड़ी ने जनरल डायर की अगुवाई में गोलियां चला कर सैकड़ों लोगों को शहीद कर दिया। उस दिन बैसाखी का त्यौहार था और दूर-दूर से यहाँ लोग आये हुए थे।

मलिक ने कहा कि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ व अपने पति प्रिंस फिलिप ने अक्टूबर 1997 में जलियांवाला बाग का दौरा किया था, लेकिन उन्होंने नरसंहार के लिए माफी नहीं मांगी थी। उन्हें इस जघन्य हत्याकांड के लिए भारत के लोगों से माफी मांगनी चाहिए।

– सुनीलराय कामरेड