BREAKING NEWS

भारत बंद के आह्वान को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक प्रतिक्रिया मिली : संयुक्त किसान मोर्चा ◾गरीबों को किराया देने की घोषणा पर केजरीवाल सरकार का यू-टर्न, HC में कहा - वादा नहीं किया था ◾खत्म हुआ किसानों का भारत बंद, 10 घंटे बाद खुले दिल्ली-एनसीआर के सभी बॉर्डर ◾महंत नरेंद्र गिरि मौत मामला : 7 दिन की सीबीआई रिमांड में भेजे गए आनंद गिरी व दो अन्य ◾महिलाओं के बाद अब पुरुषों के लिए तालिबान का फरमान- दाढ़ी बनाना और ट्रिम करना गुनाह, लगाई रोक ◾नए संसद भवन का दौरा करने पर कांग्रेस ने मोदी को घेरा, कहा- काश! PM कोरोना की दूसरी लहर के दौरान किसी अस्पताल जाते ◾भवानीपुर उपचुनाव प्रचार के आखिरी दिन लहराईं बंदूकें, BJP का आरोप- TMC ने दिलीप घोष पर किया हमला ◾किसानों के 'भारत बंद' को लेकर देश में दिखी मिलीजुली प्रतिक्रिया, जानिए किन हिस्सों में जनजीवन हुआ बाधित ◾CM बिप्लब देब का विवादित बयान, बोले- अदालत की अवमानना से न डरें अधिकारी, पुलिस मेरे नियंत्रण में है◾पाकिस्तान: ग्वादर में जिन्ना की प्रतिमा को बम से उड़ाया, बलोच ने ली हमले की जिम्मेदारी ◾भारत बंद के दौरान सिंघू बॉर्डर पर किसान की हुई मौत, पुलिस ने हार्ट अटैक को बताई वजह ◾टिकैत ने सरकार पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप, कहा- किसानों की बात सुनने के लिए मजबूर करेगा भारत बंद◾PM मोदी ने की आयुष्मान भारत-डिजिटल मिशन की शुरुआत, कहा- गरीबों की दिक्कतें होंगी दूर◾नरेंद्र गिरि मौत केस को लेकर एक्शन में CBI, बाघंबरी मठ में सुसाइड सीन को किया रिक्रिएट◾भारत बंद के बीच मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने की केंद्र से मांग- कृषि कानून करें निरस्त ◾ममता ने BJP को बताया नाचने वाले ड्रैगन की जुमला पार्टी, शुभेंदु अधिकारी ने किया तीखा पलटवार ◾भारत बंद : दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर लगा भारी ट्रैफिक जाम, गाड़ियों की लंबी कतारों से DND का भी बुरा हाल◾'भारत बंद' को मिला विपक्ष का समर्थन, कहा- काले कानून वापस लें केंद्र, किसानों का अहिंसक सत्याग्रह है अखंड ◾Coronavirus : देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 26 हजार से अधिक मामले आये सामने ◾World Corona : दुनियाभर में संक्रमितों का आंकड़ा 23.18 करोड़ के करीब, 47.4 लाख से अधिक लोगों की मौत ◾

केंद्र को कृषि कानून वापिस लेने के लिए मजबूर करें पंजाब के सभी राजनीतिक दल: आप

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली में अभी भी विरोध जारी है, लेकिन केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी हाल में कृषि कानूनों को वापिस नहीं लेगी। वहीं, दूसरी तरफ आगामी पंजाब विधानसभा चुनावो में अपनी जमीन तलाशने की जुगत में लगी आम आदमी पार्टी (आप) ने इन कानूनों के खिलाफ एकजुट होकर केंद्र को घेरने के लिए आह्वान किया है।

आप के पंजाब अध्यक्ष भगवंत मान ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को एक खुला पत्र लिखकर किसानों का समर्थन करने और उन्हें केंद्र को अपने कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर करने का आग्रह किया। संगरूर के सांसद ने अपने पत्र में कहा कि पंजाब और पूरे देश के किसान पिछले एक साल से केंद्र के ‘काले कृषि कानूनों’ के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी जायज मांगों को नहीं सुना और कोई गंभीरता नहीं दिखायी।’’ मान ने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से कई किसानों की जान चली गयी। उन्होंने लिखा, ‘‘अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार फैसला करे और किसानों की मांग के मुताबिक ‘काले कृषि कानूनों’ को निरस्त करे।’’
उन्होंने पत्र में लिखा, ‘‘आम आदमी पार्टी, पंजाब के अध्यक्ष और सांसद के साथ-साथ एक किसान के बेटे के रूप में, मैं आप सभी से किसानों के मुद्दे पर एकजुट होने और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को इस संबंध में निर्णय लेने के लिए मजबूर करने का अनुरोध करता हूं।’’
आप नेता ने सांसदों से संसद के मानसून सत्र में कानूनों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की और कहा कि सांसदों को ‘‘किसान यूनियनों द्वारा की गई अपील के मद्देनजर सत्र के दौरान बहिष्कार या वॉकआउट से बचना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘किसान हमारे देश की रीढ़ हैं’’ और शासन करने वालों तक उनकी आवाज पहुंचाना ‘‘हमारी जिम्मेदारी’’ है।

मान ने आगे कहा कि वह संसद के मानसून सत्र के दौरान अध्यक्ष की अनुमति से लोकसभा में कृषि कानूनों के संबंध में कई प्रश्न रखेंगे। आप के नेता ने कहा, ‘‘मैं जनता की आवाज उठाने वाली तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं कि वे राजनीति से ऊपर उठकर किसानों के मुद्दे को गंभीरता से लें।’’
आप सांसद का पत्र ऐसे वक्त आया है जब संयुक्त किसान मोर्चा ने बुधवार को कहा था कि उसने मानसून सत्र के दौरान संसद में सभी सांसदों को कृषि कानूनों को खत्म करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी की मांग करने के लिए एक पीपुल्स व्हिप जारी किया है। आंदोलनकारी किसानों ने कहा है कि 22 जुलाई से मानसून सत्र के अंत तक संसद के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करेंगे।