लुधियाना-अमृतसर : देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सम्मान की खातिर असंख्य देशभक्तों ने अपनी अनमोल जानें कुर्बान कर दी। अनगिनित देश वासियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया ताकि राष्ट्र ध्वज का अपमान ना हो किंतु कभी-कभार प्रशासनिक और लाल फीताशाही और अफसरान व मुलाजिमों की लापरवाही के चलते राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के प्रमाण मिलते रहते है और ऐसा ही एक प्रमाण अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट से प्राप्त हुआ है जहां ट्रस्ट के गोदाम में राष्ट्र ध्वज तिरंगे को बोरियों में भरकर लावारिसों की तरह रखा गया है। हालांकि देश के हुकमरानों ने राष्ट्रीय ध्वज के रख-रखवा और इसके क्षतिग्रस्त होने पर पूरे सम्मान और फ्लैग एक्ट के मुताबिक अंतिम संस्कार किए जाने का प्रावधान रखा है। देश की सीमाएं हो या प्रशासनिक कार्यालय, वहां हर रोज सुबह से सायं तक राष्ट्रीय ध्वज सम्मान के साथ फहराता दिखता है।

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अटारी-वाघा सीमा पर फहराए गए 360 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज के कई बार क्षतिग्रस्त होने की बातें सामने आई। अन्य कार्यालयों पर लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज पिछले समय के दौरान क्षतिग्रस्त हुए लेकिन एक बार भी फ्लैग एक्ट के तहत राष्ट्रीय सम्मान के साथ तिरंगे का संस्कार नहीं किया गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब इंम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के गोदाम में पुराने व नए ध्वजों के बोरियों में भर कर रखे जाने की पुरानी तस्वीरें सामने आई।

आरटीआइ एक्टिविस्ट पीसी शर्मा ने इस बाबत पंजाब सरकार से आरटीआइ एक्ट के तहत सवाल पूछते हुए जानकारी मांगी थी। उन्होंने इस बाबत पुलिस कमिश्नर को भी पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय ध्वज को बोरियों में भर कर रखने वाले नगर सुधा ट्रस्ट के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के साथ ही फ्लैग एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। जिस पर पुलिस कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय को पत्र लिख कर इसमें कार्रवाई करने को कहा है।

आरटीआइ एक्टिविस्ट एडवोकेट शर्मा के मुताबिक डीसी कार्यालय के संबंधित विभाग की तरफ से उन्हें चार माह पहले इस बाबत जारी पत्र संख्या एमए-1(2) 5105 के बावजूद अभी तक उक्त राष्ट्रीय झंडों की मौजूदा स्थिति बारे उन्हें कुछ स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि फ्लैग कोड आफ इंडिया के नियमों के मुताबिक तिरंगा क्षतिग्रस्त या धुंधला होने पर उसका विधिपूर्वक संस्कार करना या देश की पवित्र नदियों में उसे जल समाधि देना होता है।

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– सुनीलराय कामेरड