लुधियाना : पंजाब विधानसभा 2017 के चुनावों में मुंह की खाने के पश्चात सियासी जमीन तलाश रहे शिरोमणि अकाली दल के जत्थेदारों को पंजाब की सडक़ों पर कांग्रेसियों की खादी और पुलिस की खाकी वर्दीधारियों के खिलाफ उतरना महंगा पड़ गया। हालांकि आम जनता द्वारा साथ ना दिए जाने के साथ-साथ हाईकोर्ट की फटकार के पश्चात अकाली दल ने पंजाब के सतलुज और ब्यास पुलो के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्गो पर धरना उठाकर सडक़ें 24 घंटे पश्चात खाली कर दी।

परंतु सोशल मीडिया पर अधिकांश लोग सुखबीर सिंह बादल समेत अन्य जत्थेदारों को कांग्रेसियों के विरूद्ध लगाए इन धरनों पर सवाल पूछ रहे है कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब समेत अन्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान के वक्त अकाली कौन से खुडडों में जा छुपे थे? स्मरण रहे कि ग्रंथों के अपमान और बेअदबी के विरूद्ध रोष पूर्ण सिख संगत ने ब्यास दरिया पर सरबत खालसा के जत्थेदारों द्वारा एक बड़ा प्रदर्शन किया था तो सुखबीर सिंह बादल ने धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों को घरों से निकलने वाली संगत को काम-धंधा ना करने वाले वेलड़ बंदे (खाली बंदे )कहकर लताड़ा था। अब अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल किस मुंह से सडक़ों पर उतरे है?
जबकि दूसरी तरफ धरना खत्म करते वक्त शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कांग्रेसियों की गुंडागर्दी बरदाश्त ना करने की घोषणा के साथ-साथ अकालियों पर हुए मुकदमें वापिस होने, कार्यकर्ताओं की बड़ी जीत करार दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी में हिम्मत है तो उनपर मुकदमा दर्ज करके दिखाएं। विजयश्री का ध्वज थामे सुखबीर सिंह बादल विक्रमजीत सिंह मजीठिया समेत अपने अन्य पैरोपकारों को साथ लिए बड़े बादल प्रकाश सिंह जी का आर्शीवाद लेने गांव बादल पहुंचे तो उन्होंने सभी नेताओं को अपने बैडरूम के अंदर ही बुला लिया और सुखबीर बादल को शाबाशी दी।

उन्होंने कहा कि आज उन्हें इस बात की खुशी है कि मेरे जन्मदिन के अवसर पर सुखबीर सिंह पार्टी हितों की खातिर सडक़ पर रात काटकर आया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं भी परिवार द्वारा रखे गए कई अहम समारोहों के अवसर पर अकसर धरना प्रदर्शनों या जेलों में हुआ करते थे। इस दौरान जब हरिसिमरत कौर बादल ने अपने सवाल किया कि बादल साहब अगर सुखबीर आज जेल में चले जाते तो फिर आप क्या सोचते? इस के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरी खुशी दुगुनी हो जाती।

सूत्रों के मुताबिक सुखबीर सिंह बादल इन धरनों के द्वारा अपनी खोई हुई सियासी जमीन को प्राप्त करने में कामयाब हुए या नहीं किंतु एक अकाली जत्थेदार का यह भी कहना था कि वह इस मुहिम द्वारा पंचायती चुनावों के लिए अकाली कार्यकर्ताओं में जोश भरना चाहते थे परंतु आम लोगों की दुत्कार और हाईकोर्ट की फटकार की चाल उलटी पड़ गई। उधर हाईकोर्ट की टिप्पणी के तुरंत पश्चात कांग्रेस सरकार भी हरकत में आई और सतलुज- ब्यास दरिया के संगम पर स्थित हरिके पतन पुल पर समर्थकों सहित दिन-रात धरना लगाने पर सुखबीर सिंह बादल और मजीठिया समेत कई अकाली लीडरों के खिलाफ मामले दर्ज कर लिए गए। आज फिरोजपुर स्थित पुलिस स्टेशन मक्खु में शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल समेत अकाली आगुओं के खिलाफ धारा 144 के उल्लंघन करके राष्ट्रीय राजमार्ग 54 पर पड़ते हरिके पतन पुल पर धरना मारने के आरोपों में मामला दर्ज कर लिया गया है।

स्मरण रहे कि मल्लांवाल नगर पंचायत चुनाव के नामांकन पत्र भरने के आखिरी दिन कांग्रेसियों द्वारा अकालियों पर हमला करके अकालियों की गाडिय़ां तोड़ दी गई थी और नामांकन पत्र ना दाखिल करने के खिलाफ अकाली वर्करों ने अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना प्रदर्शन करके आवाजाही ठप्प कर दी थी। मक्कु के एसएचओ बलदेव सिंह के मुताबिक जिला मजिस्ट्रेट के हुकमों की उल्लंघना के दोष में पुलिस ने अकाली दल प्रधान सुखबीर सिंह बादल, विक्रमजीत ङ्क्षसह मजीठिया, सांसद रंजीत सिंह ब्रहमपुरा समेत 150-200 अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 283, 341, 431, 188 आईपीसी, 8-बी नेशनल हाइवे एक्ट 1956 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया है। ऐसी ही धाराएं जालंधर-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग ब्यास दरिया पर धरना प्रदर्शन करने के खिलाफ एसजीपीसी की पूर्व अध्यक्ष बीबी जगीर कौर, पूर्व वित्तमंत्री डॉ उपिंद्र जीत कौर और सांसद रंजीत सिंह ब्रहमपुरा समेत 150 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

जबकि मालेरकोटला में भी अकाली मंत्री नुसरत अली खां समेत 12 अकाली नेताओं और 100 के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। इसी प्रकार अमृतसर में भी पूर्व मंत्री गुलजार सिंह राणिके समेत 35 अकाली नेताओं और अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज है। जबकि लाइया खास में पूर्व अकाली मंत्री अजीत सिंह कुहाड़, विधायक खैहरा , विधायक टीनू समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज है। इसी प्रकार लुधियाना-जालंधर स्थित नैशनल हाईवे-1 पर पुलिस ने थाना लाडूवाल में 36 अकालियों पर बाई नेम सहित 500-600 अज्ञात पुरूष व महिलाओं पर केस दर्ज किया है। हालांकि धरने में भारतीय जनता पार्टी के कई नेता भी शामिल थे लेकिन उनका नाम पुलिस की नियमित भेजी ब्रीफींग में नहीं है। जिन अकाली नेताओं के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए है उनमें पूर्व मंत्री व शिअद प्रवक्ता महेश इंद्र सिंह ग्रेवाल, हीरा सिंह गाबडिया, शरणजीत सिंह ढिल्लों, मनप्रीत सिंह अयाली, दर्शन सिंह शिवालिक समेत अन्य अकाली नेता शामिल है।

स्मरण रहें कि अकाली-भाजपा हुकूमत के 10 साल के दौरान पंजाब में कई प्रकार के तकरीबन 70 हजार से अधिक आंदोलन हुए है और इन आंदोलनों में कई लोगों की मौत भी हुई। किंतु ऐसे धरना प्रदर्शनों पर सियासत के चलते मामले दर्ज नहीं हुए।

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– सुनीलराय कामरेड