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भीकमपुरा चिंतन शिविर : 'किसानों को लड़नी होगी हक की लड़ाई'

भीकमपुरा : 'किसानी, पानी और जवानी' पर यहां चल रहे चिंतन शिविर के दूसरे दिन रविवार को किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बेवाकी से अपनी बात रखी। सभी ने केंद्र सरकार की नीतियों को 'किसान विरोधी' बताया और आह्वान किया कि वे अपने को सक्षम बनाने के लिए संकल्पित हों। शिविर में 19 राज्यों के किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। किसान नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि किसानों की जिंदगी को सिर्फ कर्ज मुक्ति खुशहाल नहीं बना सकती, जरूरत है कि किसान को उसकी फसल का उचित दाम मिले, उसके लिए लाभकारी योजनाएं बनें और उनका सीधा लाभ उसे मिले।

किसान नेता युद्धवीर सिंह ने कहा कि वे किसानों के हित की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं। सरकारों के फैसलों के खिलाफ उन्होंने हर स्तर पर आंदोलन किया, जिसके चलते उन पर देश के अलग-अलग हिस्सों में मामले दर्ज हुए हैं। उन्हें इसकी परवाह नहीं है। उनकी बस एक ही ख्वाहिश है कि किसान का जीवन बदले। सिंह ने कहा कि किसान को सिर्फ कर्ज से मुक्ति नहीं चाहिए। सरकार उसके लिए ऐसी योजनाएं बनाए जो उसकी आमदनी बढ़ाने में सहायक हो, ताकि उसे कर्ज लेने की जरूरत ही न पड़े।

उन्होंने कहा कि बीटी कॉटन का उपयोग होने से कपास की खेती करने वाले किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं, अन्य फसलों के भी ऐसे बीज लाने की तैयारी चल रही है, जो किसानों के लिए नुकसानदेह हैं। दूसरे दिन का शिविर शुरू होने पर जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने शिविर के उद्देश्य बताए। साथ ही किसानों की समस्याओं और बढ़ते जल संकट का हवाला दिया।

डॉ. विनोद बोदनकर ने वर्तमान दौर में पर्यावरण पर प्लास्टिक से होने वाले नुकसान और प्रदूषण पर प्रजेंटेशन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि प्लास्टिक किस तरह आबोहवा और मिट्टी के उपजाऊपन को खत्म कर रही है। वहीं, जल संरक्षण पर काम करने वाले नरेंद्र चुग ने महाराष्ट्र की अग्रणी नदी पर छाए संकट का जिक्र किया और उसे विस्तार से बताया।

जलगांव की नीलिमा शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने का अभियान चलाया, उन्हें कर्ज दिलाया। आज कई परिवारों की स्थिति में बड़ा बदलाव आ गया है। किसान समस्याओं के सत्र का संचालन एकता परिषद के संस्थापक पी. वी. राजगोपाल ने किया। उन्होंने जल, जंगल, जमीन की बात की। साथ ही किसानों की जिज्ञासाएं शांत की।

तरुण भारत संघ के आश्रम में किसानों की समस्या और भावी रणनीति तय करने के मकसद से चल रहे तीन दिवसीय चिंतन शिविर एकता परिषद के संस्थापक पी.वी. राजगोपाल के निर्देशन में चल रहा है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, युवाओं के बिगड़ते हालात, भयभीत समाज व बढ़ती हिंसा और जल संकट से उजड़ते समाज पर गहन मंथन भी हुआ।

 युवाओं, किसान, मजदूरों के मुद्दे पर होने वाले संवाद के समन्वय की जिम्मेदारी सवरेदय मंडल के सचिव और जनांदोलन-2018 राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनीष राजपूत को सौंपी गई। शिविर का समापन नौ अप्रैल को होगा। पहले दिन किसानों के मुद्दे, किसान आंदोलन के जुड़ाव सहित अन्य मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।

इसमें किसान नेता रामपाल जाट, अन्ना हजारे के करीबी विनायक राव पाटिल, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, देश में 193 किसान संगठनों के संयुक्त किसान संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह, करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी, एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रण सिंह, जल-जन जोड़ो के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह, महाराष्ट्र से प्रतिभा शिंदे, रमाकांत बापू, निशिकांत भालेराव, विनोद बोदनकर, पर्यावरणविद मार्क एडवर्ड सहित बड़ी संख्या में किसान नेता व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी बात रखी। शिविर में हिस्सा लेने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, तामिलनाडु, तेलंगाना और पंजाब सहित कुल 19 राज्यों के किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता यहां पहुंचे हैं।

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