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किसानों की उपज के घाटे के लिए केन्द्र सरकार जिम्मेदार : रामपाल जाट

किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने दलहन एवं तिलहन की उपजों के घाटे के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि विदेशों से अंधाधुंध दालों का आयात एवं प्रधानमंत्री आय अन्नदाता संरक्षण अभियान (पीएम आशा) में बनाये गये नियमों के कारण किसान अपनी उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों से वंचित है और उसे अपनी उपज पर घाटा उठाना पड़ रहा है। 

श्री जाट ने आज यहां बयान जारी कर कहा कि कहा कि सरकार के किसानों की उपज की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए समुचित व्यवस्था नहीं करने के कारण किसान अपनी उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्यों से वंचित है जबकि ये मूल्य भी किसानों की जेब से हुए उत्पादन खर्च से अधिक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2014 में बीस लाख टन दालों का भण्डारण करने का निर्णय लिया और इसके लिए विदेशों से दालों का अंधाधुंध आयात किया। अभी फिर सरकार ने अरहर दाल की दो लाख टन विद्यमान आयात सीमा को बढ़कर चार लाख टन करने का निर्णय भी लिया। उन्होंने बताया कि केन्द, सरकार के भण्डारण में 39 लाख टन दाले उपलब्ध है तथा दाले आयात करने पर आयातिक दाल के भण्डारण की मात्रा बढ़ जायेगी। 

उन्होंने कहा कि इसी तरह खाद्य तेलों का आयात शुल्क दस प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया जिससे पिछले 2018-19 नवम्बर से चार महीनों में ही तेलों का आयात 1़ 61 प्रतिशत बढ़कर 48़ 62 लाख टन हो गया और फरवरी में तेलों का आयात 12़ 42 लाख टन किया गया जबकि इसके पूर्ववर्ती वर्ष के फरवरी महीने में आयात 11़ 87 लाख टन हुआ था। इन आयोतों के निर्णयों के कारण देश में दलहन एवं तिलहन उपजों के दाम गिर जायेंगे। 

उन्होंने कहा कि सरसों उत्पादाकें को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा खरीद की समुचित व्यवस्था नहीं करने एवं केन्द, सरकार द्वारा खरीद में नियम बनाकर अवरोध खड़ करने के कारण सरसों बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से 600 से लेकर एक हजार रुपए प्रति कि्वंटल का घाटा उठाकर बेचनी पड़ रही है वहीं दालों के आयत के निर्णय के कारण चने के दाम भी गिरकर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रह गये और किसानों को अपना चना बेचने के लिए पांच सौ रुपए प्रति कि्वंटल तक घाटा उठाना पड़ रहा है। 

श्री जाट ने कहा कि सितम्बर 2018 में पीएमआशा में कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत खरीद नहीं करने, एक दिन में एक किसान से 25 कि्वंटल से अधिक नहीं खरीदने तथा खरीद अधिकतम 90 दिन करने के कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद में बाधाएं उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार चना, सरसों आदि की खरीद को बंद करने जारी है जबकि अभी तक 90 दिन भी खरीद नहीं की गई है। सरकार खरीद शुरु करने से बंद करने तक की तारीखों से 90 दिन की गणना करती है। इस अवधि में चुनाव, छुट्टियों एवं अन्य कारणों से खरीद बंद रही थी। इस दौरान अनेक खरीद केन्द्रों पर 60 दिन भी खरीद नहीं हुई।