केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार ने प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के लिए किसानों का ब्यौरा उपलब्ध नहीं करवाया जिससे राज्य के पात्र किसानों को नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि अगर अशोक गहलोत सरकार किसानों के ब्यौरे संबंधी प्रक्रिया पूरी कर देती तो उन्हें योजना के तहत पहली किस्त मिल चुकी होती।

शेखावत ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों का हित करने वाली सरकार बनने का दावा कर सत्ता में आई अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान के किसानों का नुकसान किया है।” उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य की सरकारों को अपने अपने राज्य के लघु एवं सीमांत पात्र किसानों का ब्यौरा केंद्र सरकार को उपलब्ध करवाना था। इस योजना के तहत पात्र किसान को सालाना 6000 रुपये दिए जाने हैं।

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शेखावत ने दावा किया कि योजना के तहत पहली किस्त पौने तीन करोड़ किसानों के खातों में पहुंच चुकी है। मंत्री ने कहा, “राजस्थान में 50 लाख से अधिक ऐसे लघु और सीमांत पात्र किसान हैं जिनको इस योजना के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ मिलना तय था। चूंकि इस योजना में सारा पैसा केंद्र सरकार दे रही है, अत: प्रदेश सरकार पर इसका एक रुपये का बोझ नहीं आना था। राज्य सरकार को केवल अपने यहां के पात्र किसानों की सूची देनी थी। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि गहलोत सरकार ने इन किसानों को उनके हक से वंचित रखा।”

उन्होंने कहा, “फौरी तौर पर एक लाख से कुछ अधिक किसानों का डेटा भेजा गया। इसमें से आधे से ज्यादा डेटा का विभिन्न त्रुटियों के चलते सत्यापन नहीं हो पाया। राजस्थान सरकार ने इस डेटा का पुनर्सत्यापन कर नहीं भेजा। लगभग 27,000 किसानों का डेटा सत्यापित हो गया लेकिन उनको पैसा स्थानांतरित करने का अंतिम आदेश दुर्भावनापूर्ण तरीके से राज्य सरकार ने आचार संहिता लागू होने तक रोके रखा। इस प्रकार इन किसानों को भी पैसा नहीं मिला।” उन्होंने आरोप लगाया “इस सरकार ने किसानों का निवाला छीना है। राज्य सरकार ने किसानों को उनके अधिकार से क्यों वंचित रखा, उसका जवाब उसे देना चाहिए।”