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राजस्‍थान

एनजीटी का राजस्थान सरकार को निर्देश : गोवर्धन पर्वत परिक्रमा के ‘कच्चा’ पथ से टाइलें हटाओ

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बुधवार को राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि गोवर्धन पर्वत परिक्रमा के ‘कच्चा’ पथ से टाइलें हटाई जाएं और इसका वास्तविक स्वरूप बहाल किया जाए। न्यायमूर्ति रघुवेंद्र एस राठौड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए ‘कच्चा’ पथ इसके वास्तविक स्वरूप में बहाल किया जाना चाहिए क्योंकि जब नंगे पांव 21 किलोमीटर की परिक्रमा की जाती है तो सीमेंट टाइलों से बना कठिन तल या तारकोल की सड़क तीर्थयात्रियों के लिए चलना मुश्किल कर देती है। 

पीठ ने कहा, ‘‘इसके अतिरिक्त, हमें लगता है कि भरतपुर और डीग में पदस्थ राजस्थान राज्य के अधिकारी इस तथ्य से पूरी तरह अवगत हैं कि गिरिराज पर्वत की परिक्रमा नंगे पांव की जाती है, यहां तक कि दंडवत यात्रा भी की जाती है।’’ इसने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में, यह स्पष्ट है कि परिक्रमा का कोई भी कठिन तल तीर्थयात्रियों के लिए न सिर्फ मुश्किल खड़ी करेगा, बल्कि खासकर गर्मियों के मौसम में काफी असुविधा भी पैदा करेगा।’’ 

अधिकरण ने कहा कि सीमेंट की टाइलें हटाई जानी चाहिए और रास्ता वास्तविक स्वरूप में रखा जाना चाहिए। इसने यह भी कहा कि मलबा दो सप्ताह के भीतर हटा दिया जाना चाहिए। एनजीटी मथुरा स्थित ‘गिरिराज परिक्रमा संरक्षण संस्थान’ और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें उन्होंने एनजीटी के चार अगस्त 2015 के निर्देशों के अनुपालन की मांग की थी।