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राजस्थान भाजपा सतीश पूनिया के नेतृत्व में लड़ेगी अगला विधानसभा चुनाव

क्या राजस्थान में मौजूदा भाजपा नेतृत्व ही 2023 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव की अगुवाई करेगा? पार्टी में गुटबाजी के बीच रेगिस्तानी राज्य के राजनीतिक गलियारों में पूछे जा रहे इस सवाल का जवाब हाल ही में आयोजित 'जन आशीर्वाद यात्रा' के दौरान दिया गया है, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव ने घोषणा की कि भाजपा वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में राजस्थान में तीन चौथाई बहुमत के साथ अगली सरकार बनाएगी।

रैली को संबोधित करते हुए यादव ने कहा, मैं पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं कि 2023 में सतीश पूनिया के नेतृत्व में तीन चौथाई बहुमत से भाजपा की सरकार बनेगी और मुख्यमंत्री के चेहरे का फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करेगा। इस बयान ने एक नए सिरे से बहस छेड़ दी है, क्योंकि यह ऐसे समय में सामने आया है, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ गुटबाजी की कहानियां चल रही हैं, जबकि उनके समर्थक राज्य में वर्तमान नेतृत्व के खिलाफ खुलकर बोलते नजर आ रहे हैं।

साथ ही पूनिया का कार्यकाल 2022 में पूरा हो जाएगा और उन्हें सेवा विस्तार दिया जाएगा और प्रदेश भाजपा उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व पूनिया के प्रदर्शन से काफी खुश है, क्योंकि वह अपराध, किसानों की कर्जमाफी का झूठा वादा और अशोक गहलोत सरकार के तहत लंबित भर्ती जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर लाने में सफल रहे हैं। इसके अलावा, हाल ही में 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने वाली 'जन आशीर्वाद यात्रा' में किसानों और ओबीसी की उपस्थिति में भारी भीड़ देखी गई है।

इस रैली में पूनिया और यादव को धन्यवाद देने वाले किसान बड़ी संख्या में मौजूद थे। केंद्रीय नेतृत्व यह देखकर भी खुश है कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, गुलाबचंद कटारिया, राजेंद्र राठौर, सी.पी. जोशी और राज्य पार्टी इकाई के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच अच्छा तालमेल है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसा लगता है कि केंद्रीय नेतृत्व गुटों के मुद्दों को छोड़कर आगे बढ़ गया है और अब इसे राज्य के मौजूदा नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।

राज्य भाजपा ने सामाजिक इंजीनियरिंग के समीकरण को संतुलित करने के लिए यात्रा के दौरान विभिन्न जातियों के नेताओं को उतारा, जो एक बार फिर इस बात का संकेत था कि राज्य की टीम अगले चुनाव से पहले सभी जातियों पर ध्यान दे रही है। विश्लेषकों का कहना है कि हाल ही में पूर्व मंत्री और राजे के समर्थक रोहिताश्व शर्मा को अनुशासनहीनता के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है, जो यह साबित करता है कि केंद्रीय नेतृत्व ने वर्तमान टीम को आगामी चुनावों में सफलता की कहानी लिखने का मार्ग प्रशस्त करने की पूरी शक्ति दी है।