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ये हैं वह 7 बातें जो मृत्यु के बाद 1 घंटे तक होती है

जिंदगी का सबसे बड़ा सच है मृत्यु जिसे शायद कोई भी नहीं टाल सकता है। जिसने मृत्युलोक में प्रवेश किया उसे एक दिन न एक दिन अपने शरीर को छोड़कर जाना ही होगा। शरीर में मौजूद ऊर्जा जिसे आत्मा कहते हैं वो कभी समाप्त नहीं होती है हां रूपान्तरित जरूर होती रहती है। यह ऊर्जा जब शरीर से निकलती है तो यह कुहासे के बराबर होती है जिसकी छवि उसी तरह होती है जिस शरीर से यह निकलती है। मृत्यु के कुछ वक्त तक आत्मा को बड़ा ही अजीबो-गरीब अनुभव से गुजराना होता है जो आत्मा के भी दुखद और कष्टकारी होती है। 

1.अचेत अवस्था

शरीर से आत्मा निकलकर कुछ देर तक अचेत अवस्था में रहती है। आत्मा को इस प्रकार का अनुभव होता है जैसे कि कड़ी मेहनत करने के बाद थका हुआ इंसान बहुत गहरी निंद में होता है,लेकिन कुछ ही देर बाद आत्मा अचेत से सचेत हो जाती है साथ ही उठकर खड़ी हो जाती है। 

2.छटपटाहट और बेचैनी

शरीर से निकलकर खड़ी हुई आत्मा अपने सगे-संंबंधियों को बुलाती है,लेकिन उसकी आवाज कोई सुन नहीं पाता है। इससे आत्मा को बेचैनी होनी शुरू हो जाती है। आत्मा परेशान होकर सभी लोगों से कुछ कहना चाहती है पर उसकी आवाज उसी तक गूंजकर रूक जाती है क्योंकि उसे कोई सुन नहीं सकता ना ही देख सकता है। क्योंकि व्यक्ति तो केवल भौतिक चीजों को ही महसूस करता है। 

3.व्यवहार समान

किसी भी इंसान की बॉडी से जब आत्मा निकलती है उसे कुछ समय तक मालूम ही नहीं होता कि वह शरीर से अब अलग हो गई है। वो उसी तरह से व्यवहार करती है जैसे शरीर में रहते हुए उसका व्यवहार होता था। 

4.संचार नहीं होता

सालों तक बॉडी में रहने से जो भी सांसारिक माया का आवरण आत्मा पर पड़ा हुआ होता है उससे मोहवश आत्मा दुखी होकर कभी अपने मृत शरीर को तो कभी अपने संबंधियों को देखकर उनसे बात करना चाहती है,लेकिन उसकी कोशिश बेकार हो जाती है। 

5.प्रवेश की कोशिश

आत्मा हमेशा कोशिश करती है कि वो फिर से बॉडी में प्रवेश कर ले,मगर यम के दूत उसे शरीर में प्रवेश नहीं करने देते हैं। धीरे-धीरे इंसान की आत्मा यह स्वीकार करने लगती है कि अब जाने का समय हो गया है। मोह का बंधन कमजोर होने लगता है और वह मृत्यु लोक विदा होने के लिए तैयार हो जाती है। 

6.दुखी हो जाती है

शरीर के मृत हो जाने के बाद आत्मा अपने परिजनो को रोते बिलखते देख बहुत ज्यादा दुखी हो जाती है और खुद भी दुख से व्यकुल होकर रोती है,लेकिन उसके वश में कुछ भी नहीं होता है क्योंकि वो खुद लाचार होती है और अपने जीवन काल में किए कर्मों को याद करके दुखी होती है। यम के दूत आत्मा से कहते हैं कि चलो अब यहां से चलने का वक्त आ गया है और कर्मों के अनुसार उसे लेकर यममार्ग की ओर निकलते हैं। 

7.नया जन्म होता है कर्म आधारित

थोड़े ही समय में आत्मा मृत्युलोक की सीमा को पार करके एक ऐसे मार्ग पर पहुंच जाती है जहां पर ना कोई सूरज की रोशनी होती है और ना ही चांद की चांदनी। उस लोक में सिर्फ और सिर्फ अंधेरा होता है। 

यहां पर फिर आत्मा अपने कर्मों और इच्छाओं के मुताबिक कुछ समय तक विश्राम करती है। कई आत्माएं जल्दी शरीर धारण कर लेती है तो कुछ लंबे वक्त तक विश्राम के बाद अपनी इच्छा के मुताबिक नया शरीर धारण करती है।