आज हम आपके सामने एक ऐसा दुखद संयोजन लेकर आए हैं जिसके बारे में आपको पहले ही शायद पता होगा। हम खेल और मौत की बात कर रहे हैं। पूरी दुनिया ओलंपिक गेम्स देखती है। हर कोई ओलंपिक गेम्स को उत्साह से देखता है क्योंकि यह ऐसी प्रतियोगिता है जिसमें मनोरंजन और सच्ची उपलब्धियों को दिखाया जाता है।

ओलंपिक हमें किसी भी खिलाड़ी के सच्चे समर्पण को दिखाता है। कभी-कभी इस खेल में भी कुछ दुखद मौतें भी हुई हैं जिससे हम सबको आहात भी हुई है। इस विश्वव्यापी लोकप्रिय खेल के दौरान कुछ ऐसी अप्रत्याशित गंभीर मौतें भी हो चुकी हैं।

आज हम आपको ओलंपिक गेम्स की उन 10 अप्रत्याशित मौतों के बारे में बताने जा रहे हैं।

1. क्नुत जेन्सेन

साल 1960 में ओलंपिक गेम्स रोम में हुए थे। उस समय लगभग तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट का था। उस गेम्स में हर खिलाड़ी गर्मी से निपटने की कोशिश कर रहा था और साथ ही खेलों में प्रदर्शन अच्छा देने की कोशिश में भी लगा हुआ था। डानिश की टीम पहले से ही उन खेलों में सबसे पीछे चल रही थी। उनकी टीम के एक साइकिल चालक तो गर्मी की वजह से पहले ही हार गए थे बाकी तीन ने अपनी साइकिल की गति बनाने की पूरी कोशिश की।

उस गर्मी का सबसे ज्यादा असर टीम के खिलाड़ी क्नुट जेन्सेन के ऊपर पड़ा था। क्नुट जेन्सेन रेस की बीच में ही उनकी तबीयत खराब हो गई थी और वह सर के बल नीचे गिर गए थे और उनके सिर पर फ्रैक्चर आ गया था। उन्होंने उठने की पूरी कोशिश की लेकिन वह कर नहीं पाए और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

2. लूजर नोदर कुमारिताश्वीली

लुगर नादर कुमारिताश्विली जॉर्जिया देश के थे और वह वैंकूवर के शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में मारे गए थे। वह ट्रेनिंग रन के दौरान चोटिल हो गए थे। वह 150 मील प्रति घंटे की गति से दुर्घटना ग्रस्त हो गए थे और उसी समय उनकी मृत्यु हो गई थी। वह घटना बहुत ही भयानक थी और पूरे खेल पर इसकी छाया आ गई थी।

3. निकोलाई पेरिस जेट

1936 के ओलपिंग गेम्स बर्लिन में हुए थे उसके दौरान रोमानियाई के मुक्केबाज निकोलाई पेरिस जेट चार दिन बाद फाइटरवेट बॉक्सिंग मैच के बाद उनका निधन हो गया था।

4. फ्रांसिस्को लज़ारो

यह कहानी एक मैराथन रनर की है जो मोम में कवर था। साल 1912 के ओलंपिक जो स्टॉकहोम में हुए थे और उसमें फ्रांसिस्को लाजरो नाम के रनर की मौत मैराथन में दौड़ते समय हो गई थी। वह उस समय के पहले व्यक्ति बन गए थे जिसकी मौत ओलंपिक में हुई थी।

5.एलिस्का मिसकोवा

एलिस्का मिसाकोवा उस समय की एकमात्र व्यक्ति थीं जिन्हें मरणोपरांत स्वर्ण पदक मिला था। 1948 के लंदन ओलंपिक खेलों में एलिस्का मिसाकोवा पोलियो की वजह से बीमार हो गईं थीं। वह चेकोस्लोवाकिया की टीम का हिस्सा थीं। एलिस्का की जिस दिन अस्पताल में मृत्यु हुई थी उसी दिन उनकी टीम को ओलंपिक में स्वर्ण पदक मिला था।

6. पोलिटिकल कांस्पीरेसी

ओलंपिक के 10 दिन पहले यह मौत हुई थी और इसे निश्चित रूप से एक राजनीति से प्रेरित मौत ही कहा जाएगा। यह मौत 1968 के मैक्सिको खेलों के दौरान हुई थी। उस समय मैक्सिकन सरकार ने ओलंपिक में बहुत पैसा खर्च किया था जिसकी वजह से वहां के लोगों को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा था।

ऐसा इसलिए हुआ थ क्योंकिन उस समय मैक्सिको की हालात आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थी। उद्घाटन समरोह से 10 दिन पहले ही 10,000 छात्रों ने प्लाजा डे लास ट्रेस कलुरस में इसका विरोध किया था। उस समय सरकार चाहती थी कि सब कुछ ठीक हो जाए जिसके लिए उसने वहां पर 100 छात्रों को गोली मार दी थी। यह एक क्रूर सरकार का काम था।

7. टेरर प्लॉट

साल 1996 में अटलांटिक ओलंपिक के दौरान अटलांटा में एक आतंकी हमाला हुआ था। एरिक रॉबर्ट रूडोल्फ ने शताब्दी ओलंपिक पार्क में अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ा पाइप बम लगाया था। सौभाग्य से उस समय रिचर्ड ज्वेल नाम के एक अंडरकवर जासूस ने उस संदिग्ध पैकेज को देखा था। स्टेडियम को तभी खाली कर दिया गया था लेकिन बम फट गया था और उसमें 111 लोग घायल हो गए थे और दो की मौत हो गई थी।

8. रोस्टेड डावेस

डावेस शांति और चिकित्सा का प्रतीक माना जाता है। साल 1988 में सियोल ओलंपिक हुए थे उस दौरान कई कबूतरों को छोड़ा गया था लेकिन वह उडऩे की बजाय उद्घाटन समारोह के फूलदान पर बैठ गए थे। जैसे ही उन फूलों को जलाया गया तो कबूतर भी वहां पर जिंदा जल गए और उन कबूतरों को जिंदा जलते दर्शक, मीडिया औैर पूरी दुनिया देख रही थी। यह एक बहुत ही बुरा दृश्य था जिसे कभी किसी ने किसी भी ओलंपिक में नहीं देखा था।

9. म्युनिक डिजास्टर

1972 के म्यूनिख ओलंपिक को एक राजनीतिक रूप से माना जाता है हालांकि वह उस समय एक पूर्वी पश्चिम जर्मनी विभाजित था। उस समय देश शांतिपूर्ण ओलंपिक चाहता था। दुर्भाग्यपूर्ण ऐसा कुछ नहीं हुआ और खेल भयानक तरीके से समाप्त हुए। उस समय एक आतंकी हमला हुआ था जिसमें 17 लोगों की जान चली गई थी। 1970 में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच में तनाव के दम चरम पर था। कुछ एचआईवी ने खुद को आंतकवादी हमला बताते हुए ब्लास्ट करवा दिया था और वह एक काला सितंबर की तरह याद किया जाता है।

10. लिमा फुटबॉल रायट

1934 में ओलंपिक फुटबॉल क्वालीफाइंग मैच के दौरान 300 से भी ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई थी। यह मैच पेरू और अर्जेंटीना के बीच में हुआ था। पेरू ने इस मैच को बराबर में खत्म किया था लेकिन पेरू के फैन्स को यह पसंद नहीं आया और उन्हें दंग शुरू कर दिया था। इस दंगे को जवाब को रोकने के लिए पुलिस ने भीड़ पर आंसू गैस छोड़ दी थी। इसमें 318 लोगों की मौत हो गर्ई थी।