संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन की याचिका के मुताबिक एपल के मशहूर वायरलेस एयरपॉड्स हेडफोन पहनने वालों को कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है। इस बात का खुलासा यूनाइटेढ नेशन और वल्र्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने याचिका में किया है। बता दें कि इस जारी की गई याचिका पर 40 देशों के वैज्ञानिकों ने सहमति जताई है।

एक्सपट्र्स ने खासतौर पर एयरपॉड्स के प्रयोग को लेकर चेतावनी दी है क्योंकि यह कान की अंदरुनी सतह पर ऐसी तरंगों को छोड़ता है जो कान के लिए काफी हानिकारक है। जानवरों पर हुई एक स्टडी में इस बात की पुष्टिï हुई है कि रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगों से कैंसर होने का पूरा-पूरा खतरा है।

कैंसर का खतरा कम पावर की तरंगों से भी होता है

रेडियो तरंगों से भी ज्यादा खतरनाक हाई लेवल तरंगे होती हैं। जो गर्मी पैदा करने का मुख्य कारण है और बहुत बार तो जला भी देती है। वैज्ञानिक तो आज भी कम पावर वाली रेडियो तरंगो को काफी समय तक काम में लेने के लिए मना करते हैं।

सूत्रों के अनुसार रेडियो तरंगों ने जानवरों की प्रजनन क्षमता,न्यूरोलॉजिकल और अनुवांशिक रुप से बहुत नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट करने वाले वैज्ञानिकों को लगता है कि इन तरंगों की वजह से भविष्य में और कई बड़ी-बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए वह नियमकों को जिम्मेदार मानते हैं जिन्हें इसपर रोक लगा देना चाहिए।

उन्होंने ये भी बताया कि इसकी सटीक वजह ढूंढने के लिए अभी काफी जांच करने की जरूरत है। उन्होंने लिखा, “सुरक्षा मानकों को स्थापित करने वाली विभिन्न एजेंसियां ​​आम जनता की रक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाने में विफल रही हैं, खासतौर पर ऐसे बच्चे जो ईएमएफ के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।

साल 2018 में कंपनी ने बेचे 2.90 करोड़ एयरपॉड्स

बता दें कि बीते साल 2018 में 2 करोड़ 90 लाख सफेद वायरलेस एयरपॉड्स को बेचा गया है जबकि साल 2017 में कंपनी ने 1करोड़ 60 लाख जोड़ी यही एयरपॉड्स को बेचा था। इस वायरलेस एयरपॉड्स को ब्लूटूथ से कनेक्ट किया जाता है जिसमें पॉपुलर शार्ट डिस्टेंस रेडियो कम्युतिकेशन टेक्रोलॉजी का प्रयोग किया जाता है।

किसी भी उपकरण को वायरलेस कम्युनिकेट करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एनर्जी की कई तरह की तरंगों का उपयोग करना पड़ता है ,वहीं ब्लूटूथ कम पावर की रेडियो तरंगो का उपयोग करता है।

एयरपॉड्स दिमाग के बेहद करीब होते हैं जिनसे कैंसर का खतरा अधिक होता है

बता दें कि नई याचिका के लेखकों का कहना है कि अनुसंधान ने सबूतों का खुलासा किया है कि ईएमएफ कम स्तर पर भी कार्सिनोजेनिक हो सकता है साथ ही मस्तिष्क कैंसर उन रूपों में से है जो ईएमएफ विकिरण के लिए अनुसंधान लिंक देते हैं।

हालांकि ब्लूटूथ पर बहुत कम शोध किए गए हैं लेकिन मस्तिष्क के लिए एयरपॉड्स की निकटता उन्हें विशेष रूप से संबंधित बनाती है। कैंसर और ईएमएफ पर संबंधित अनुसंधान से यह भी पता चला है कि सेल फोन विकिरण – जो इसके विपरीत नहीं है जो ब्लूटूथ से आता है वह मस्तिष्क और कान को जोड़ने वाले तंत्रिका के साथ गैर-कैंसर ट्यूमर का कारण बन सकता है।