आज की तारीख में इंसान को हवा पानी के साथ साथ जिस चीज़ की जरुरत सबसे ज्यादा है वो है पैसा , क्योंकि पैसे के बिना जिंदगी कैसी होगी ये कोई सोचना भी नहीं चाहेगा। पर क्या ऐसी जगह हो सकती है जहाँ पर बिना पैसे इंसान गुज़र बसर कर सके वो भी सब सुख सहूलियतों के साथ तो आपका जवाब क्या होगा ?

ओरोविल

बेशक ये बात सुनने में अटपटी लगती है पर आपको बता दें की भारत में एक ऐसा शहर मौजूद है जहाँ पर रुपयों पैसे की टेंशन के बिना भी लोग जिंदगी जी रहे है वो भी पूरे सम्मान और शान्ति के साथ। यह शहर चेन्नई शहर से सिर्फ 150 किलोमीटर दूर है |

ओरोविल

इस जगह का नाम ओरोविल है और यह शहर 1968 में बना था और इसको बनाने वाली मीरा अल्फाजों थी, इस शहर को सिटी ऑफ़ डॉन भी कहा जाता है, इस शहर को बसाने का सिर्फ एक ही मकसद था की यह शहर जात-पात और भेदभाव से दूर रहे और यहा कोई भी इंसान जा कर रह सकता है |

ओरोविल

इस शहर में 50 देशों के लोग रहते है और इस शहर की आबादी 24000 लोगो की है और यहा पर एक मंदिर भी बनाया गया है, लेकिन इस मंदिर में पूजा नहीं होती सिर्फ योगा किया जाता है। इसकी रूपरेखा वास्तुकार रोजर ऐंगर ने तैयार की थी।

ओरोविल

ओरोविल का तात्पर्य एक ऐसी वैश्विक नगरी से है, जहां सभी देशों के स्त्री-पुरुष सभी जातियों, राजनीति तथा सभी राष्ट्रीयता से ऊपर उठकर शांति एवं प्रगतिशील सद्भावना की छांव में रह सकें। ओरोविल का उद्देश्य मानवीय एकता की अनुभूति करना है।ओरोविल भारत के संविधान के एक अधिनियम के माध्यम से ओरोविल फाउन्डेशन द्वारा शासित है।

ओरोविल

अतः ओरोविल फाउंडेशन के सचिव किसी व्यक्ति विशेष की ओरोविल सदस्यता की पुष्टि या उसे खारिज करने के प्रभारी हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय शासी बोर्ड की नियुक्ति करता है, जो बदले में निधि एवं संपत्ति प्रबंधन, बजट-समन्वयन, 1’Avenir (नगर-योजना प्राधिकरण) आदि महत्वपूर्ण समितियों का गठन करता है।

ओरोविल

अतः पूरी तरह से भारत सरकार के नियंत्रणाधीन यह फाउंडेशन वर्त्तमान में नगर के लिए अपेक्षित पूरी ज़मीन के आधे हिस्से का मालिक है। शेष भूमि धन उपलब्ध होने पर ख़रीदी जा रही है।

कुदरत का ऐसा बरसा कहर की कुछ पलों में पत्थर बन गए इस शहर के 20,000 लोग !