आज हम आपको बताने जा रहे है भोजन के कुछ नियम के बारे में , जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए है अच्छा ! जी हाँ , वैसे तो हिन्दू धर्म में भोजन के करते वक्त भोजन के सात्विकता के अलावा अच्छी भावना और अच्छे वातावरण और आसन का बहुत महत्व माना गया है। यदि भोजन के सभी नियमों का पालन किया जाए तो व्यक्ति के जीवन में कभी भी किसी भी प्रकार का रोग और शोक नहीं होता।

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हिन्दू धर्म अनुसार भोजन शुद्ध होना चाहिए, उससे भी शुद्ध जल होना चाहिए और सबसे शुद्ध वायु होना चाहिए। यदि यह तीनों शुद्ध है तो व्यक्ति कम से कम 100 वर्ष तो जिंदा रहेगा। तो चलिए जानते है कुछ ऐसे ही नियमों के बारे में …

> भोजन करने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोएं। जिससे हाथों में मौजूद बैक्टीरिया खाने के साथ आपके शरीर में प्रवेश कर नुकसान न पहुंचाएं।

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> खाने को कम से कम 30-35 बार तक चबाकर खाएं। कई बार पौष्टिक और संतुलित खाना खाते समय लोग उसे सिर्फ दस से पंद्रह बार ही चबाते हैं। जिससे पेट से जुड़ी समस्याए दूर होती हैं। खाना चबाकर खाने से कब्ज दूर होती है, दांत मजबूत होते हैं, भूख बढ़ती है आैर कब्ज व एसिडिटी नहीं होती है।

> साथ ही इस बात का भी ध्यान रखे कि पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना चाहिए। इस उपाय से हमारे शरीर को भोजन से अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन करना अशुभ माना गया है। पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से रोगों की वृद्धि होती है। इसीलिए दक्षिण और पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके खाना नहीं खाना चाहिए।

> कभी भी बिस्तर पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। खाने की थाली को हाथ में लेकर भोजन नहीं करना चाहिए।

> थाली को किसी बाजोट या लकड़ी की पाटे पर रखकर भोजन करना चाहिए।

> खाने के बर्तन साफ होने चाहिए। टूटे-फूटे बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।

> कांसे के पात्र में भोजन करना निषिद्ध है।

> भोजन अँगूठे सहित चारों अँगुलियों के मेल से करना चाहिए।

> भोजन के समय पानी पीने से पाचन क्रिया पर असर होता है। इसलिए खाने के आधे या एक घंटे पहले या बाद में पानी पिएं।

> जल का गिलास हमेशा दाईं ओर रखना चाहिए।

> भोजन अँगूठे सहित चारों अँगुलियों के मेल से करना चाहिए।