अविश्वास प्रस्ताव में शिवसेना के दूरी बनाए रखने के बाद बीजेपी ने भी अब महाराष्ट्र में अकेले ही चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है। इसके संकेत आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को दिये हैं। उन्‍होंने महाराष्ट्र के बीजेपी कार्यकर्ताओं को सभी 48 लोकसभा और 288 विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ने के लिए संगठन मजबूत करने के निर्देश दिए। शाह ने कहा कि सभी सीटों पर ऐसी स्थिति होनी चाहिए कि तीनों पार्टियों शिवसेना, कांग्रेस व एनसीपी के एक साथ लड़ने पर भी चुनाव बीजेपी जीते।

अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से दूरी बनाए रखने के शिवसेना के फैसले से अमित शाह नाराज बताए जा रहे हैं। अमित शाह ने अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले ही शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को फोन किया था। उसके बाद संभावना जताई जा रही थी कि शिवसेना सरकार को समर्थन देगी।

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना के बर्ताव से नाराज अमित शाह ने आज मुंबई में महाराष्ट्र बीजेपी के नेताओं से कहा कि जिस तरह बीते कुछ समय से शिव सेना का व्यवहार रहा है, ख़ासकर अविश्वास प्रस्ताव में अनुपस्थिति, उसके बाद हमें महाराष्ट्र में अकेला चुनाव लड़ना पड़ सकता है। इसलिए हमें सभी 48 लोकसभा सीटों पर तैयार रहना चाहिए।

अमित शाह ने महाराष्ट्र बीजेपी नेतृत्व से कहा है कि सभी 48 सीटों पर लोकसभा प्रभारियों की नियुक्ति जल्द से जल्द की जाए। शिवसेना पहले ही घोषणा कर चुकी है कि 2019 का चुनाव वो अकेले ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को 23 सूत्री कार्यक्रम के तहत काम करने को कहा है. जिसमें प्रमुख हैं :-

  •  ऑनलाइन जुड़ने वाले कार्यकर्ताओ को सक्रिय किया जाए।
  •  एक बूथ 25 यूथ के फॉर्मूले पर काम हो।
  •  हर बूथ से बाइक रखने वाले पांच लोगों को जोड़ा जाए।
  •  हर बूथ के मंदिर की लिस्ट, उनके ट्रस्टी और पुजारी का नंबर और डिटेल्स इकट्ठी की जाए।
  •  हर बूथ में मस्जिदो की लिस्ट बनाई जाए।
  •  किसी भी तरीके के लाभार्थियों की लिस्ट और डिटेल्‍स लाई जाए।
  •  तीनों पार्टियो के एक होने पर भी 51 फीसदी मतदान बीजेपी को कराने का लक्ष्‍य दिया।
  •  अपने-अपने इलाके में सभी से लगातार संपर्क रखा जाए।
  •  मुद्रा बैंक से ज्यादा से ज्यादा लोन दिलाने की कोशिश हो।
  •  हर बूथ में 10 एससी, 10 एसटी, 10 ओबीसी कार्यकर्ता जोड़े जाए।
  •  प्रत्‍येक पांच घरों के लिए एक बीजेपी कार्यकर्ता तय हो।
  •  अन्य पार्टियों की जानकारी निकाली जाए।
  •  विपक्षी पार्टियों के नाराज कार्यकर्ताओं की लिस्ट बनाकर उनसे संपर्क साधा जाए।
  •  विधायक जनता के बीच जाकर काम करें।
  •  विस्तारकों को ऑनलाइन रिपोर्ट देनी होगी, उनके लिए अलग मोबाइल ऐप है।
  •  विस्तारक सरकार की तरफ से किसी को भी काम कराने का आश्वासन न दें।

अविश्वास प्रस्ताव से ठीक पहले शिवसेना ने मोदी सरकार को समर्थन नहीं करने का फैसला किया था। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का बहिष्कार करेगी। सामना में लिखा गया था कि इस समय देश में तानाशाही चल रही है। इसका समर्थन करने की जगह वो जनता के साथ जाना चाहेगी।