मां दुर्गा के नौ रूपों को खुश करने का अवसर साल में दो बार नवरात्रों के रूप में आता है। पहला हिन्दू नवरात्र चैत्र में आता है तो वहीं दूसरा शारदेय नवरात्र गणेशोत्सव के बाद आता है। चैत्र नवरात्र इस बार से 6 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। इन नवरात्रों में भक्त माता से सिद्धियां प्राप्त करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए विविध धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ का आयोजन करेंगे। इसके साथ ही सिद्ध देवी के दरबारों में भी विविध अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा।

पंडितों के मुताबिक इस बार के नवरात्रों में अभिजीत मुहूर्त में घटनास्थापना का शुभ योग बन रहा है। यह मुहूर्त सारी देवी साधकों और आम भक्तों के लिए यह शुभ है। वह इस मुहूर्त में कोई भी अच्छा काम करेंगे तो उनके वह काम सफल रहेगा।

पंडितों के मुताबिक चैत्र नवरात्र में शास्त्र के अनुसार कन्या या फिर कुमारी का पूजन करने को शुभ माना जाता है। इस पूजन में दस साल तक की कन्याओं का विधान होता है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी पूजन व कन्याभोज किया जाता है।

नवरात्र का पर्व नौ दिनों तक चलता है और इसमें मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी मां के इन नौ रूपों की पूजा की जाती है।

कब है घट स्थापना मुहूर्त का समय

बता दें कि घट स्थापना से चैत्र नवरात्र पूजन का आरंभ हो जाएगा। शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन सुबह स्नाना करके संकल्प कर लें। जब व्रत का संकल्प कर लेंगे तो उसके बाद मिटटी की वेदी बनाकर जवारे बोएं। उसके बाद इस वेदी पर घट स्थापित करें।

उसके बाद आप अपनी कुल देवी की प्रतिमा इस घट के ऊपर स्थापित कर दें फिर पूजा करें। उसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ नियमित रूप से करें। पाठ के समय अखंड दीप जालया जाता है। इस साल घट स्थापना 6 बजकर 9 मिनट से लेकर 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही अभिजित मुहुर्त में भी स्थापना की जा सकती है जो कि बहुत ही शुभकारी होगा।

चैत्र नवरात्रों के दिनों में दुर्गा पूजा के साथ तंत्र और मंत्र के कार्य भी होते हैं। बिना मंत्र के कोई भी साधाना पूरी नहीं मानी जाती है। शास्त्रों के मुताबिक हर इंसान को सुख-शान्ति पाने के लिए किसी न किसी ग्रह की उपासना करनी चाहिए। माता के इन नौ दिनों में ग्रहों की शान्ति करना विशेष रूप से लाभ किया जाता है। इन दिनों में मंत्र जाप करने से इंसान की सारी मनोकामना जल्दी पूरी हो जाती हैं।

इस तरह है चैत्र नवरात्र की तिथि

पहला नवरात्र 4 अप्रैल शनिवार को
दूसरा नवरात्र 7 अप्रैल रविवार को
तीसरा नवरात्र 8 अप्रैल सोमवार को

चौथा नवरात्र 9 अप्रैल मंगलवार को
पांचवां नवरात्र 10 अप्रैल बुधवार को
छष्ठ नवरात्र 11 अप्रैल वीरवार को
सातवां नवरात्र 13 अप्रैल शनिवार को
अष्टमी 13 अप्रैल शनिवार को
नवमी 14 अप्रैल रविवार को

इस अद्भुत वृक्ष को स्वर्ग से मृत्युलोक लाया गया था भगवान शिव की आराधना के लिए, आज भी है इस जगह पर