विष्णु पुराण हमें जीवन में जीने का सही तरीका बतलाते हैं। मनुष्य को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए,इनमें खाने-पीने से लेकर वस्त्र धारण करने तक के सभी नियम शामिल है। विष्णु पुराण में कुछ ऐसे नियमों का जिक्र भी किया गया है जिनको वस्त्र न पहनकर उन कामों को अपमानित करने जैसा है और इंसान पाप का भागीदार बनता है। तभी पूजा-अर्चना में बिना सिले दो ही कपड़े धारण करने का विधान है। तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे कामों के बारे में जिन्हें नग्न अवस्था में भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

कभी भी निर्वस्त्र होकर स्नान नहीं करें

विष्णु पुराण के बाहरवें अध्याय में बताया गया है कि इंसान को पूरी तरह नग्न होकर स्नान कभी नहीं करना चाहिए। स्नान करते वक्त आपके शरीर में एक ना एक कपड़ा जरूर होना चाहिए। भगवान कृष्ण भी स्नान करते समय गोपियों के कपड़े चुराकर ये संदेश देना चाहते थे कि इंसान को कभी भी बिना कपड़ो के स्नान नहीं करना चाहिए। इससे जल देवता का अपमान होता है।

निर्वस्त्र होकर सोना भी नहीं चाहिए

विष्णु पुराण के मुताबिक कभी भी नग्न होकर सोना भी नहीं चाहिए। ऐसा करने से चंद्र देवता का अपमान होता है। साथ ही रात के वक्त पितृगण् अपने परिजनों को देखने आते हैं और उन्हें नग्न अवस्था में देखकर वह काफी दुखी हो जाते है और वह बिना आशीर्वाद दिए ही चले जाते हैं। ऐसा भी बोला जाता है कि रात को नग्न अवस्था में सोने से नकारात्मक शक्तियां आप पर हावी हो जाती हैं।

आचमन के समय भी नहीं रहना चाहिए निर्वस्त्र

व्यक्ति को आचमन के समय नग्न अवस्था में नहीं रहना चाहिए। ऐसा करना विधि के खिलाफ होता है। आचमन के दौरान आंतरिक शुद्घि होती है इस प्रकार शुद्घ मन और ह्दय से की गई पूजा ही सफल हो पाती है।

निर्वस्त्र होकर पूजा भी नहीं करनी चाहिए

कई सारे लोग निर्वस्त्र होकर पूजा करते हैं लेकिन विष्णु पुराण में इसको बिल्कुल गलत बताया गया है। पूजा या फिर यज्ञ करते समय मनुष्य को दो बिना सिले हुए कपड़े पहनने का विधान है। शास्त्रों में कहा गया है कि सिलाई सांसारिक मोह-माया के बंधन का प्रतीक है। हर बंधन से अलग होकर भगवान की पूजा करनी चाहिए।