हम सभी रात को चैन की नींद लेकर सो रहे होते हैं तो उसका श्रेय हम हर किसी को दे देते हैं। फिर चाहे वह हमारे माता-पिता हो,किस्मत हो या और कोई भी लेकिन इन सब चीजों को थोड़ा सा श्रेय तो उन जवानों को भी जरूर जाना चाहिए जो हमेशा सरहद के पर खड़े होकर केवल हमारी ही रक्षा कर रहे होते हैं। ये तो आप और हम सभी जानते ही हैं कि सेना से हमारे जवानों की जिंदगी कोई आम नहीं होती है।

पैराट्रूपर ट्रेनिंग के दौरान भारतीय सैनिक

खैर उनसे जुड़ा कुछ भी आसान नहीं होता है एक ओर वह अपने परिवार को छोड़ वह अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर दुश्मनों से लड़ते हैं तो दूसरी ओर किसी भी भयंकर आपदा के वक्त वह शहरों में आकार हमारे परिवार की रक्षा करते हैं। इन्हीं सब चीजो और जीवन को अपनी फोटो के जरिए दिखाने की पूरी कोशिश की है फोटोग्राफर अर्जुन मेनन ने।

अर्जुन ने अपनी सीरीज The Extraordinay में बताया है कि ये जवान केवल सर्जिकल स्ट्राइक या पाकिस्तान औैर चीन से ही जंग नहीं लड़ते बल्कि जरूरत पडऩे पर ये लोगों के घर जा जाकर उनकी रक्षा करते हैं।

क्या आपने कभी सोचा है कि आर्मी,नेवी,एयरफोर्स में काम कर रहे न जाने कितने जवानों की जिंदगी हर रोज खतरें में रहती है। लेकिन सेना की तो अपनी बात ही अलग है।

ये फोटो एक बेटे की श्रद्घांजलि ही हैं जो अपने ही शहीद पिता और उनके जैसे जांबाज सैनिकों की जिंदगी की उस अनछुई सच को दिखाने की कोशिश कर रहा है जिन्हें बहुत से लोग नहीं देख पाते हैं सैनिक केवल बॉर्डर पर ही नहीं रहते बल्कि वह तो आम लोगों के साथ भी जुड़े हुए है।

केरल ही बाढ़ से लेकर शिलॉन्ग की बर्फबारी में फंसे 2500 सैलानियों को सुरक्षित बचाकर और उनको दोबारा से जिंदगी जीने को मौका सैनिक ही तो देते हैं।

ये है सैनिकों की जिंदगी दिखाने के पीछे की असल कहानी…

ये फोटो शहीद लेफ्टिनेंट जनरल जी.वी.मेनन को एक श्रद्घांजलि जो अपनी ड्यूटी करते हुए करीब 16 साल पहले एक हेलिकॉप्टर कै्रश में उनकी मौत हो गई थी। अब उनका बेटा अर्जुन मेनन अपने ही पापा की जिंदगी पर रोशनी डाल रहा है।

बता दें की अर्जुन मेनन अपनी खास सीरीज The Extraordinary के अंतरगत सैनिकों की जिंदगी दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।बता दें कि अर्जुन की प्ररेणा उनके पिता ही है। शहीद लेफ्टिनेंअ जनरल जी.वी.मेनन इंडियन आर्मी में पायलट थे।

अर्जन बचपन से ही अपने पापा को अपना सबसे बड़ा हीरो मानते थे। जब वह बड़े हेलिकॉप्टर उड़ाते थे पृथ्वी के कुछ सबसे दुर्गम इलाकों में लोगों की मदद करते हुए वह अपने पिता की कॉम्बैट टे्रनिंग लेते हुए अपने पिता की कल्पना कर सकते थे।

बचपन में अर्जुन का फेवरेट कार्टून भी “G.I Joe” था, लेकिन ये सोचना भी दिलचस्प था कि उनके पिता खुद उस कार्टून से भी ज्यादा खतरनाक स्टंट रोज़ करते हैं। अर्जुन हमेशा से ही चाहते थे कि वह इन सैनिकों के जीवन को दिखाएं और एक अलग प्रोजेक्ट जो इनकी मेहनत और बहादुरी को दिखाए।

मेहनत सिर्फ फोटो खींचने में नहीं बल्कि इस सपने को सच बनाने में भी लगी..

अर्जन खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें इतनी अच्छी उपलब्धि मिली कि वह ऐसी फोटोग्राफी कर सकें। लेकिन सारी मेहनत तो सेना के पास जाने भी थी। एक इटंरव्यू के दौरान अर्जुन ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस से लेकर इंडियन आर्मी तक पहुंचने में उन्हें 6-8महीने का वक्त लगा।

उन्होंने धीरे-धीरे ये सारे पड़ाव पार किए तब जाकर ये फोटोशूट की अनुमति ली। अर्जुन ने महाराष्टï्रा,राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में शूअ किया और अर्जुन को अपने इस प्रोजेक्ट को शूट करने में 21 दिन का वक्त लगा।

 आर्मी की कॉम्बैट ट्रेनिंग और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान की है ये तस्वीरें हिमालय की चट्टानों से लेकर राजस्थान के रेतीले टीलों तक में बिना किसी चूक सेना के जवान अपने काम को बड़ी तत्परता से पूरा करते हैं।

फोटो के सहारे देना चाहते हैं प्रेरणा..

अर्जुन का मदसद केवल अपने पिता की श्रद्घांजलि ही नहीं बल्कि देश के जवानों के सेना की ओर आकर्षित करना भी है। बता दें कि आज भी सेना में 52000 सैनिकों की कमी है और अकेले अधिकारियों की ही 7600पोस्ट खाली है।

 अर्जुन केवल फोटोग्राफी ही नहीं बल्कि वह अपनी सीरिज के जरिए लोगों को प्रेरणा देना चाहते हैं। अर्जन के मन में बहुत बार यह सावल भी आते हैं कि उनके पिता यह सारी तस्वीरें देखते तो क्या कहते।

बता दें कि ये एक सोच ही है जो अपने पति के प्रति सम्मान बेटे की जिंदगी को नई दिशा दे रहा है। ये आर्मी की बेहद खास सीरिज और कहानी ही नहीं बल्कि ये असल जिंदगी से जुड़ी हुई उम्मीद है।

अर्जुन की ये बेहद खास सीरीज लोगों के लिए एक प्ररेणा बनेगी और कैमरा लेंस की सहायता से आर्मी के जीवन को दिखाने की ये कोशिश जरूर एक न एक दिन रंग लाएगी।

1#

2#

3#

4#

5#

अंत में अर्जुन मेनन और शहीद लेफ्टिनेंट जनरल जी.वी.मेनन की एक तस्वीर जो दिखाती है कि वाकई अर्जुन किस हद तक अपने पिता से जुड़े हुए थे।