आंध्र प्रदेश के तिरुमाला स्थित भगवान वेंकटेश्वर के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। आपको बता दे कि तिरुपति बालाजी मंदिर 9 से 17 अगस्त तक भक्तों के लिए बंद रहेगा। मंदिर प्रशासन के मुताबिक, इस दौरान मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान होंगे। यह अनुष्ठान हर 12 साल बाद अघमास में किया जाता है।

तिरुपति मंदिरइसे अस्ताबंधना बाललया महासंपरोकष नाम से जाना जाता है।अधिकारी ने बताया कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि इस धार्मिक क्रिया के दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।

तिरुपति मंदिरवहीं, भारतीय मूल के दो अमेरिकी नागरिकों ने शनिवार को यहां भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में 13.5 करोड़ रुपये दान किए। आंध्र प्रदेश के रहने वाले इका रवि और गुठीकोंडा श्रीनिवास ने मंदिर की ‘हुंडी’ और मंदिर प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न ट्रस्टों में ये धनराशि दान किए।

तिरुपति मंदिरइस प्राचीन मंदिर के गर्भ गृह के ढांचे में मामूली बदलाव के लिए ‘अष्टबंधना बालल्या महासमप्रोक्षणम् ’ धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है।तिरुमाला तिरुपति देवास्थानम् बोर्ड (टीटीडी) के अध्यक्ष पुट्टा सुधाकर यादव ने बतााय कि टीटीडी बोर्ड ने इस दौरान श्रद्धालुओं को प्रवेश नहीं देने का फैसला किया है।

तिरुपति मंदिरबोस्टन में एक दवा कंपनी आरएक्स एडवांस के संस्थापक सीईओ रवि ने ‘हुंडी’ में 10 करोड़ रुपये दान किए, जबकि फ्लोरिडा स्थित सॉफ्टवेयर बनाने और परामर्श देने वाली कंपनी, जेसीजी टेक्नोलॉजीज के सीईओ श्रीनिवास ने ट्रस्टों को साढ़े तीन करोड़ रुपये दान किए।

तिरुपति मंदिरउन्होंने दुनिया के सबसे अमीर मंदिर कहे जाने वाले तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों से मुलाकात की और आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री अमरनाथ रेड्डी की मौजूदगी में उन्हें चेक सौंप। मंत्री ने दोनों अनिवासियों की इस भावना की सराहना की।

तिरुपति मंदिरहजारों की तादाद में श्रद्धालु रोजाना यहां आते हैं और हुंडी में चढ़ावा चढ़ाते हैं, जबकि कुछ लोग ऑनलाइन दान करते हैं। टीटीडी सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों में कई ट्रस्ट संचालित करता है। टीटीडी के अधिकारियों के मुताबिक, 2018-19 में मंदिर का राजस्व 2,894 करोड़ रुपये रहने की संभावना है, जिसमें से हुंडी मंदिर में आने वाला चढ़ावा 1,156 करोड़ रुपये हो सकता है।

तिरुपति मंदिरआपको बता दें कि यह मंदिर पहली बार इतने लंबे समय (6 दिन) के लिए बंद किया जा रहा है। पिछले अवसरों को याद किया जाए तो हर 12 साल पर होने वाले इस अनुष्ठान के दौरान मंदिर खुला रहता था लेकिन कुछ घंटों के लिए मंदिर में दर्शनार्थियों का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता था।

तिरुपति मंदिरबताया जा रहा है कि पहले ऐसा इसलिए हो पाता था क्योंकि उन दिनों मंदिर में इस कदर भक्तों की भीड़ नहीं हुआ करती थी। ताजा हालात यह हैं कि अगर एक दिन में आए भक्तों का अंदाजा लगाया जाए तो यह संख्या औसतन एक लाख के पार ही होगी।