होली का त्योहार इस साल 20 और 21 मार्च को है। ऐसा माना जाता है कि होली का त्योहार जीवन में खुशियां और शांति लाता है। रंगों वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है जो इस बार 20 मार्च को है और 21 मार्च को रंगों वाली होली है। वैसे तो रंगों का त्योहार होली पूरे विश्व में किसी भी तरह से मनाई जाती है लेकिन होलिका दहन सिर्फ भारत में ही होता है। बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए होलिका दहन का माना जाता है।

रंगों वाली होली केएक दिन पहले होलिका दहन मनाई जाती है और यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। होलिका दहन के अगले दिन रंगों से खेलने की परंपरा होती है जिसे हम धुलेंदी भी कहते हैं। वैसे रंगों वाली होली को धुलंडी नाम से भी जाना जाता है।

भस्म सारी नकारात्मक शक्तियां दूर करता है

होली की पूजा होलिका दहन वाले दिन करते हैं और जब होलिका दहन हो जाता है तो वहां से लोग जलती हुई भस्म अपने घर ले जाते हैं और उस भस्म को अपने पूरे घर में घुमाते हैं। होलिका दहन की भस्म को घर की सारी नकारात्मक शक्तियों को दूर करने के लिए घुमाते हैं।

उसके बाद जब यह भस्म ठंडी हो जाती है तो इसे अपने माथे पर लगा लिया जाता है। शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि भस्म को माथे पर लगाने से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है। इस भस्म में शरीर के दूषित द्वव्य सोखने की बहुत क्षमता होती है। इतना ही नहीं इस भस्म को शरीर पर लगाने से कई तरह के चर्म रोग में दूर हो जाते हैं।

इस भस्म को कुछ लोग तो तांबे या चांदी की ताबीज में डालकर काले धागे के अंदर इसे बांधकर अपने गले में पहनते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस भस्म को पहने से व्यक्ति की तरह की नकारात्मक शक्तियों से दूर रहता है और छुटकारा भी पाता है। इसके अलावा अगर यह ताबीज बच्चे अपने गले में पहनते हैं तो उन्हें नजर नहीं लगती है। इसके साथ व्यक्ति पर कई सारी तांत्रिक क्रियाओं का बिल्कुल भी प्रभाव नहीं होता है।

होलिका दहन की पूजा के दौरान इन बातों का जरूर रखें ध्यान-

1. जब आप पूजा कर रहे हैं तो आप पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके बैठे और होलिका पूजा करने के लिए गोबर से बनी हुई होलिका और प्रह्लाद की प्रतीकात्मक प्रतिमाएं जरूर रखें। इस पूजा में बाकी सामग्री के तौर पर फूलों की माला, मौसमी फल, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच या सात प्रकार के अनाज, नई गेहूं की बालियां और एक लोटा जल यह सब रखें। इसके अलावा जो पकवान आपने होली के लिए बनाए हैं उसे भी पूजा में रखें और उन्हें चढ़ाएं।

2. सारी सामग्री चढ़ाने के बाद आप होलिका केचारों तरफ सात बार परिक्रमा करें फिर जब अग्जि प्रज्जवलित हो जाए तो उसमें जो आप नई गेहूं की बालियां और बाकी फसलों की बालियां लाए हैं उन्हें अर्पित करें फिर जल से अघ्र्य दें।

3. होलिका दहन के लिए सबसे ज्यादा याद रखने वाली बात यह है कि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होलिका में अग्नि प्रज्जवलित की जाती है उसके बाद डंडे को बाहर निकाल दिया जाता है। उसके बाद होलिका दहन के दौरान वहां पर मौजूद सारे लोगों काो तिलक लगाएं और फिर प्रसाद दें।

 

4. उसके बाद होलिका दहन की राख को आप अपने घर ले जाएं और घर के हर दरवाजे पर इसे छिड़कें इससे आपके घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आती है और संपन्नता बनी रहती है।