हाल ही में हुए 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में लागू धारा-370 को हटाने की मांग उठ रही है। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे आखिर धारा-370 का क्या मतलब है और लोग क्यों इस धारा को हटाने की मांग कर रहे हैं। तो चालिए आपको बताते हैं इस धारा के बारे में विस्तार से…

बता दें कि पूरे देश से अलग रखने का काम धारा 370 के तहत आता है। क्योंकि ये सब इस धारा के प्रावधानों की वजह से होता है। यही करण है कि इस धारा को खत्म करने की मांग की जाती है।

जानिए धारा 370 की प्रावधान…

1.धारा 370 के तहत जम्मू-कश्मीर में रहने वाले हर एक व्यक्ति को दोहरी नागरिकता मिली हुई है जबकि जम्मू-कश्मीर के अलावा भारत के किसी हिस्से में रहने वाले व्यक्ति को केवल एक नागरिकता मिली होती है।


2.जम्मू-कश्मीर में भारत का झंडा नहीं फहराया जाता क्योंकि यहां पर एक अलग झंडा है जिसको केवल जम्मू-कश्मीर की मान्यता मिली हुई है।

3.जम्मू-कश्मीर में भारत के झंडे का आपमान करने के बाद भी यहां पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जाती है क्योंकि यहां पर ऐसा करने पर अपराध नहीं माना जाता है।

4.अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी और राज्य के व्यक्ति से शादी कर लेती है तो उस महिला को नागरिकता नहीं मिलेगी और वह महिला कश्मीरी नहीं कहलाएगी।

5.जम्मू-कश्मीर की महिलाओं के ऊपर शरीयत कानून लागू किया जाता है जो बाकी किसी राज्यों में लागू नहीं है।

6.अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला पाकिस्तानी से शादी कर लेती है तो उस व्यक्ति को भी कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है।

7.भारत द्घारा बनाए गए नियम कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते हैं। यही कारण है कि भारत की सुरक्षा पर संकट मंडराता है और इसी वजह से वह धारा 370 को हटाने की मांग कर रहे हैं।

8.भारत और अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 साल का होता है जबकि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 सालों का होता है।

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