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मकर संक्रांति धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी होती है खास, जानें इसके महत्व

नए साल का पहला महीना जनवरी में कई सारे त्योहार, जयंतियां और खुशियां लेकर आता है। साल के पहले महीने में स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई जाती है और इस बार 12 जनवरी को यह मनाई जाएगी। उसके बाद खुशी का त्योहार लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाती है फिर मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है। हिंदुओं का सबसे खास त्योहार मकर संक्रांति का माना जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व भी है। 

ऐसी मान्यता है कि मकर राशि में जब सूर्य प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति का योग बन जाता है। लेकिन इसके सारे बदलाव भी इसके साथ होते हैं। धर्म के अलावा कई बाकी चीजों से भी मकर संक्रांति का संबंध जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व भी है। चलिए आपको मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व बताते हैं। 

1. नदियाें में वाष्पन क्रिया मकर संक्रांति के समय पर होती है। इस क्रिया से कई तरह के रोग दुर होते हैं। इसलिए कहा जाता है कि विशेष महत्व इस दिन नदियों में स्नान करने का होता है। 

2. उत्तर भारत में ठंड का मौसम मकर संक्रांति के दिन होता है। तिल-गुड़ का सेवन इस मौसम में करना लाभकारी होता है। इस बात को चिकित्सा विज्ञान भी मानता है। शरीर को तिल और गुड़ के सेवन से ऊर्जा की प्राप्ति होती है। सर्दी के मौसम में यह ऊर्जा शरीर की रक्षा करती है। 

3. इसके साथ ही खिचड़ी का सेवन इस दिन किया जाता है और यह वैज्ञानिक कारण होता है। पाचन को खिचड़ी दुरुस्त रखती है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए अदरक और मटर मिलाकर खिजड़ी का सेवन करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर को बैक्टीरिया से लड़ने में मदद मिलती है। 

4. सूर्य की उत्तरायन स्थिति का महत्व पुराण और विज्ञान दोनों में बहुत ज्यादा है। दिन बड़ा होता है सूर्य के उत्तरायन होने पर जिससे मनुष्य की कार्य क्षमता बढ़ती है। वह मानव प्रगति की तरफ बढ़ता है। मनुष्य की शक्ति में वृद्धि भी प्रकाश में वृद्धि की वजह से होती है। 

5. मकर संक्रांति के दिन से रात छोटी और दिन बड़े हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी दिन बड़ा होने से ज्यादा होती है और अंधकार कम होता है रात छोटी होने से। यही वजह है कि मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में अंधकार से प्रकाश की तरफ होने का बदलाव होता है।