आज हम आपको एक ऐसे पौधे के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसे काफी पुराने वक्त से अशुभ माना जाता है। लेकिन जब हम इसके औषधीय गुणों की करते हैं तो यह पौधा गुणों की खान से कम नहीं है। हम बात कर रहें हैं सत्यानासी के पौधे के बारे में। बता दें कि यह पौधा इतना गुणी है कि यह पुराना से पुराना घाव हो या दाद,खाज,खुजली हो उसे चुटकियों में ठीम कर देता है। सबसे महत्वपूर्ण बात इस पौधे की यह है कि यह बांझपन को जड़ से खत्त्म कर देता है।

ये पौधा भारत में सभी स्थानों पर पाया जाता है है और मुख्य रूप से शुष्क क्षेत्रों में इसका बाहुल्य होता है। यह आपको खेत ,खलिहान ,नदी ,नाला हर जगह मिल जायेगा। यह दो प्रकार के फूलों वाला होता है एक पीले फूल और दूसरा सफ़ेद फूल वाला। यह दोनों प्रकार के पौधे औषधीय रूप से सामान होते हैं। इसके पत्ते कटीले और इसे तोड़ने पर सुनहरे रंग का दूध निकालता है।

यह पौैधा वैसे तो औषधीय गुणों से भरपुर है लेकिन आज हम आपको इसके प्रमुख घरेलु उपचारों के बारे में बताएंगे। निसंतानता अथवा बांझपन। यह एक ऐसी परेशानी है जिससे हर आदमी को काफी ठेस पहुंचती है। इंसान के पास सब कुछ होते साते भी जब उसको संतान नहीं होती तो वह व्यक्ति बहुत दुखी हो जाता है।

यदि कोई भी व्यक्ति इस समस्या की वजह से मुसीबत में है तो वह सत्यानासी के पौधे की जड़ की छाल को छाया में सुखाकर इसका पाउडर बना लें। इसको सुबह खाली पेट एक से दो ग्राम दूध के साथ लें इसके रोजना सेवन करने से निसंतानता और धातु रोग की परेशानी केवल 14 दिनों में जड़ से खत्म हो जाएगी।

यदि परेशानी थोड़े ज्यादा उम्र के व्यक्ति को है तो इसका सेवन अधिक ज्यादा दिन भी करना पड़ सकता है। यदि हम इसकी जड़ों को धोकर इनका पाउडर बना लें और इसका प्रयोग सुबह मिश्री के साथ कर ले तो भी निसंतानता जल्द खत्म हो जाएगी। और संतान की प्राप्ति होती है। यह इसके लिए रामबाण औषधि है।

नपुंसकता- इसके लिए सत्यानासी की जड़ों को पीस कर ,एक ग्राम सत्यानासी की जड़ का पाउडर और इतनी ही मात्रा में बरगद का दूध आपस में मिलाकर चने के आकार की गोलियां बना लें। इन गोलियों को लगातार 14 दिन तक सुबह -शाम पानी के साथ देने से नपुंसकता रोग खत्म हो जाता है। यह भी एक रामबाण उपाय है।

अस्थमा -इसके लिए सत्यानासी की जड़ों का चूर्ण एक से आधा राम दूध या गरम पानी से लेने से अस्थमा रोग ठीक हो जाता है। Asthma

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