आकस्मिक मौत हो जाना किसी भी परिवार के बेहद दुखद समय होता है। ऐसे में चारों तरफ से संकट ही नजर आते है। कई परिवारों में ऐसे मामले सामने आते है की मौत तो दुःख मनाने के बाद मामला आता मृत व्यक्ति की संपत्ति के बंटवारे का और अगर मृत व्यक्ति की वसीयत नहीं बनी हुई है तो पारिवारिक विवाद खड़ा हो जाता है।

property dispute

ऐसी स्थिति में क्या होता है और कैसे कानूनी तरीके से संपत्ति का बंटवारा किया जाता है हम आपको बताते है। अगर मरने वाला कोई वसीयत नहीं बना गया है तो भी उत्तराधिकारी अपना हक पा सकता है। इसके लिए उसे कुछ दस्तावेजों की जरूरत होगी।

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कम से कम 95 फीसदी समस्याएं उत्तराधिकार प्रमाणपत्र और मृत्यु प्रमाणपत्र से दूर हो सकती हैं।’ भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उत्तराधिकार प्रमाणपत्र ऐसा दस्तावेज होता है जो धारक को मृतक की तरफ से (उसके नाम पर देय हो) कर्ज की रकम या प्रतिभूतियां पाने का अधिकार देता है।

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उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए आपको किसी मजिस्ट्रेट या हाईकोर्ट में जाना होगा। आमतौर पर अदालत में अलग सेल होता है जो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करता है। अचल संपत्ति के मामले में गिफ्ट डीड जैसे दूसरे दस्तावेज भी काम के हो सकते हैं। मरने वाले के बैंक खातों को एक्सेस करने की प्रक्रिया अलग है।

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अगर उसने नामांकन किया है तो स्वाभाविक तौर पर बैंक खाते में जमा रकम पर नामिती का हक होगा। अगर मरने वाले ने नामांकन किया हुआ है तो उसके आधार पर बैंक खाते की बचत या निवेश पर दावा कर सकता है। लेकिन ज्यादातर लोगों के सामने दिक्कत तब आती है, जब मरने वाले ने न नामांकन किया हुआ है और न ही कोई वसीयत बनाई है।

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बैंक खाता एक्सेस करने के लिए आपको मृत्यु प्रमाणपत्र की सर्टिफाइड कॉपी की जरूरत होगी। बैंक देखते हैं कि क्या मरने वाले ने खाते के लिए किसी का नामांकन किया है या नहीं। माता-पिता की अकस्मात मृत्यु हो जाती है और वह अपने नाबालिग बच्चे के नाम कोई वसीयत नहीं छोड़ जाते हैं।

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इस स्थिति में बच्चा क्या करेगा? गुप्ता के मुताबिक, ‘नाबालिग बच्चे को अदालत में अपने अभिभावक या अदालत द्वारा नियुक्त अभिभावक के जरिए केस दाखिल करना होगा या याचिका दायर करनी होगी। मरने वाले के वसीयत नहीं छोड़े जाने से जो दिक्कतें होती हैं, उसका समाधान है।

वसीयत का कानून

लेकिन ज्यादातर लोगों का मानना है कि बेहतर तो यही होगा कि सबको वसीयत बनानी चाहिए जिससे आपके परिवार को आपके गुजर जाने के बाद परिवार के लोगों को कोई दिक्कत नहीं आए।

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