नयी दिल्ली : संग्राम सिंह और केविन रेडफोर्ड के बीच हुए बहु प्रतीक्षित कुश्ती मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने अमेरिकी खिलाड़ी को घरेलू दर्शकों से खचाखच भरे तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में मात देते हुए पहली के.डी. जाधव मेमोरियल अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। पहले राउंड में रेडफोर्ड का जलवा देखने को मिला। अमेरिकी रेसलर ने अपनी चपलता का परिचय दिया और संग्राम को बैकफुट पर धकेल दिया। हालांकि संग्राम इससे प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने दूसरे राउंड में शानदार वापसी करते हुए अमेरिकी खिलाड़ी पर दबाव बनाया और दूसरे राउंड का अंत तीन अंकों (12-9) की बढ़त लेते हुए सकारात्मक तौर पर किया।

तीसरे राउंड में संग्राम ने रेडफोर्ड पर दबाव बनाए रखा और 16-11 की बढ़त ले ली। इस राउंड में भारतीय खिलाड़ी का दबदबा साफ देखा जा सकता था। भारतीय खिलाड़ी के पास बढ़त थी, इसी बीच केविन ने तुरंत वापसी की और अगले राउंड में अंकों के अंतर को कम कर दिया। दोनों खिलाड़ी अपनी जी-जान लगा कर लड़ रहे थे, लेकिन भारतीय खिलाड़ी अंतिम राउंड में 24-20 की बढ़त के साथ गए। आखिरी राउंड में भारतीय खिलाड़ी ने अपने विपक्षी को कोई भी मौका नहीं दिया और 27-23 से जीत हासिल की।

इससे पहले, चैम्पियनशिप के पहले मुकाबले में भारत के शेपाल यादव ने हमवतन सचिन अत्री को 15-0 से मात दी। सचिन दूसरे राउंड में अपना कंधा चोटिल कर बैठे और इसी कारण वह मुकाबला पूरा नहीं कर पाए। चैम्पियनशिप के दूसरे मुकाबले में काफी रोमांच देखने को मिला, लेकिन दुर्भाज्ञवश इसका अंत भी पहले मुकाबले की तरह हुआ। संजय देसवाल को चौथे राउंड में पसली में चोट लगी जिसके कारण वह मुकाबला पूरा नहीं कर पाए और प्रतीक भक्त को विजेता घोषित कर दिया गया।

चैम्पियनशिप के तीसरे मैच में स्टूडेंट ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले लाभांशू ऋषिकेश ने ओम प्रकाश के खिलाफ मुकाबले में शानदार शुरुआत करते हुए अच्छी बढ़त ले ली थी, लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाए और अपने फुर्तीले विपक्षी के सामने अंक गंवा बैठे। ओम ने तीसरे राउंड के अंत तक 13-3 से बढ़त ले ली थी। इसके बाद लाभांशू वापसी नहीं कर पाए और 18-3 से ओम ने मैच अपने नाम किया। चौथा मैच महिलाओं के बीच था जिसमें एकता और आकांक्षा आमने-सामने थीं। आकांक्षा ने पहले राउंड का अंत काफी जल्दी से किया। आक्रामक आकांक्षा ने मैच की शुरुआत से ही अपना दबदबा दिखाया और अपने बेहतरीन दाव के जरिए अपनी विपक्षी को पटखनी देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। के.डी.जाधव अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट के दौरान बेहद शानदार प्रतिभाएं देखने को मिली जो आगे जाकर देश के हर कोने में लोगों को इस खेल को पेशेवर तौर पर लेने के लिए प्रेरित करेंगी।