बॉलीवुड में साल 1996 में फिल्म पापा कहते हैं आई थी। यह फिल्म महेश भट्ट ने बनाई थी जो बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह से फ्लॉॅप हो गई थी। लेकिन इस फिल्म के एक गीत ने तीन लोगों को बहुत बड़ी शोहरत दी थी। वह तीन लोग थे सिंगर उदित नारायण, एक्ट्रेस मूयरी कांगो और एक्टर जुगल हंसराज इन सभी को बहुत बड़ी शोहरत मिली थी। इस गीत के बोल थे घर से निकलते ही, कुछ दूर चलते ही, रस्तेमें उसका घर।

यकीनन, इसे पढ़ते ही आपके कानों में भी इन गाने की धुन बजने लगी होगी। समंदर किनारे प्रेमिका के ख्‍वाबों में खोया प्रेमी याद आ गया होगा। यह गाना है ही इतना मधुर कि 21 साल बाद भी इसे सुर उसी तरह जवां हैं।

लेकिन क्‍या आप जानते हैं वो महबूबा इन दिनों कहां है, जिसके लिए यह गाना लिखा, गाया और फिल्‍माया गया। जी हां, हम बात कर रहे हैं फिल्‍म की क्‍यूट सी एक्‍ट्रेस मयूरी कांगो की।

लंबे अरसे से गायब है एक्ट्रेस मयूरी कांगो

मयूरी कांगो लंबे अरसे से बॉलीवुड से गायब हैं। आखिरी बार वो 2000 में आई तेलुगू फिल्म ‘वामसी’ में नजर आई थीं। इसके बाद वो ना तो किसी बॉलीवुड पार्टी या फंक्शन में दिखीं और ना ही किसी फिल्मी इवेंट में। असल में मयूरी ने फिल्‍मों और फिल्‍मी दुनिया को अलविदा कह दिया है। अब वो एक कंपनी की मैनेजिंग डायरेक्‍टर हैं और दिल्‍ली से सटे गुरुग्राम (गुड़गांव) में नौकरी करती हैं।

मयूरी का जन्‍म औरंगाबाद में हुआ है। 28 दिसंबर 2003 को उन्‍होंने वहीं एक एनआरआई बिजनेसमैन आदित्‍य ढिल्‍लों से शादी कर ली। इसके बाद वह पति के साथ न्‍यूयॉर्क चली गईं।

मयूरी और आदित्‍य की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी। दिल मिले और फिर जोड़ी भी बन गई। इस कपल ने 2011 में प्‍यारे से बेटे रेयान को जन्‍म दिया।

फिल्‍मों में करियर आगे बढ़ता हुआ नहीं देख, मयूरी ने सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूयॉर्क से एमबीए की डिग्री ली। मयूरी अब गुड़गांव में ही रहती हैं। वहीं उनका ऑफिस भी है।

कुछ इस तरह हुआ फ़िल्मी सफर शुरू

मयूरी का फिल्‍मी सफर 1995 में शुरू हुआ था। वह तब हाई स्‍कूल बोर्ड एग्‍जाम की तैयारी कर रही थीं। सईद अख्‍तर मिर्जा की नजर मयूरी पर पड़ी। वो उन दिनों बाबरी मस्‍ज‍िद विध्‍वंस पर फिल्‍म ‘नसीम’ बना रहे थे।

मयूरी को इसमें लीड रोल ऑफर किया गया। मयूरी ने कई दफा इनकार किया। लेकिन फिर मान गईं। इस फिल्‍म की खूब सराहना हुई।

महेश भट्ट ने ‘नसीम’ देखी। वह मयूरी की मासूमियत से प्रभावित हुए और अपनी फिल्‍म ‘पापा कहते हैं’ में कास्‍ट किया। इसके बाद मयूरी ‘होगी प्यार की जीत’ और ‘बादल’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। लेकिन एक्‍ट‍िंग करियर नहीं चल सका।

इसके बाद साल 2000 में मयूरी ने छोटे पर्दे पर भी एंट्री ली। वह ‘नरगिस’ (2000), ‘थोड़ा गम थोड़ी खुशी’ (2001), ‘डॉलर बाबू’ (2001) और ‘किट्टी पार्टी’ (2002) जैसे सीरियल्‍स में काम किया। हालांकि यहां भी उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली।

अमेरिका शिफ्ट होने और एमबीए करने के बाद मयूरी ने 2004 से 2012 तक अमेरिका में ही जॉब किया। 2013 में वह फिर से इंडिया आ गईं।

अधिक जानकारियों के लिए बने रहिये पंजाब केसरी के साथ