15 मार्च के दिन माला दत्ता ने अपने कॉलेज पूरा होने के 34 साल बाद पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। इस डिग्री को प्राप्त करते हुए ये दिन और भी ज्यादा यादगार इसलिए बना क्योंकि उनकी 28 साल की बेटी श्रेया मिश्रा ने भी 15 मार्च के दिन ही पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है।

माँ और बेटी को एक साथ मिली पीएचडी डिग्री

बता दें कि माला दत्ता रक्षा मंत्रालय के साथ काम करने वाली एक भारतीय आर्थिक सेवा अधिकारी हैं। उन्होंने बताया कि 1985 में वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपने अर्थशास्त्र में मास्टर पूरा करने के बाद वह पीएचड़ी करना चाहती थी। आगे माला दत्ता ने बताया कि मुझे 2012 में काम से ब्रेक लेना पड़ा जब मेरी छोटी बेटी ने अपनी 12 वीं के बोर्ड के एग्जाम दिए। यही वो समय था जिस टाइम मैंने पीएचडी के लिए दाखिला लिया था। तब मैंने मंत्रालय से अवकाश लेकर अपनी पीएचडी पूरी करने पर गंभीरता से काम किया। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने एक साथ मां और बेटी की जोड़ी को पीएचडी पूरा करते हुए देखा है।

माला दत्ता की बेटी श्रेया विश्व बैंक में सलाहकार हैं। जिन्होंने ग्रेजुएशन करने के दो साल बाद मनोविज्ञान से अपना पीएचडी में दाखिला कराया। पीएचड़ी में दाखिला लेने के बाद माला दत्ता और उनकी बेटी श्रेया ने महसूस किया कि हमें पीएचडी को एक साथ पूरा करना चाहिए। जो हमारी जिंदगी का सबसे अलग पल बन सकता है। हलांकि हमारे विषय बिल्कुल अलग थे। श्रेया ने बताया कि मैंने अपनी मां से मार्गदर्शन लेना शुरू किया और पीएचडी को पूरा करने के लिए तीन साल कड़ी मेहनत भी की थी।

पिछले साल मां और बेटी ने अपने प्रोजेक्ट और मौखिक परीक्षा भी दी थी। यह मेरे लिए एक बेहद शानदार अनुभव था क्योंकि मुझे अपनी बेटी की उम्र के साथ सह-छात्रों के साथ बहुत कुछ सीखने को मिला। माला दत्ता ने कहा कि मेरी बेटी को दीक्षांत समारोह में पीएचडी की डिग्री हासिल करने की प्रेरणा मिली है।

श्रेया ने बताया कि…

मेरी शादी होने के एक दिन बाद यानी 19 नवंबर को दीक्षांत समारोह था। तब हमें अपनी डिग्री में शामिल होने का मौका नहीं मिला। यह बात मेरे और मेरी मम्मी दोनों के लिए निराशाजनक थी। माला दत्ता और श्रेया दोनों अपनी डिग्री 15 मार्च को दिल्ली विश्वविद्यालय लेने गए। उस समय हमने अपने सपने को महसूस किया और अपनी डिग्री को एक साथ लिया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि यदि दीक्षांत समारोह के दिन ये डिग्री प्राप्त की होती तो आप लोग भी समाचारों की सुर्खियां बनते। लेकिन श्रेया का कहना है कि अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि इस दिन अब मेरे दादा-दादी और मेरे पति इस अनोखे पल का हिस्सा बनेंगे।