जुलाई महीने के अंत में भारत समेत दुनिया के लोग 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण चंद्रग्रहण से रूबरू होंगे। हालांकि जानकार भारत के कई हिस्सों में यह चंद्रग्रहण नहीं दिखने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। यह चन्द्रग्रहण गुरु पूर्णिमा के दिन यानी 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबी अवधि वाला चंद्रग्रहण (Lunar eclipse) पड़ेगा।

Lunar eclipse104 साल बाद आ रहा चंद्रग्रहण (Lunar eclipse ) पौने चार घंटे का होगा। पंडित शास्त्री ने बताया कि शुक्रवार को रात 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 3:49 बजे खत्म होगा। यह चंद्रग्रहण 3 घंटे 54 मिनट तक चलेगा। 2:55 बजे से सूतक लगेगा और 3:54 मिनट पर पर्वकाल रहेगा।

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उधर, आषाढ़ माह की अमावस्या (13 जुलाई) को सूर्यग्रहण भी पड़ रहा है, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया,  मेलबॉर्न, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रिया के उत्तरी भाग में नजर आएगा। वहीं, 11 अगस्त को लगने वाला सूर्यग्रहण चीन, तिब्बत, नार्वे और मंगोलिया में दिखेगा।  इस दौरान चांद ब्लड जैसा लाल दिखेगा। इसलिए इसे ‘ब्लड मून’ नाम दिया जा रहा है।

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इस दौरान पूर्ण चंद्रग्रहण की अवधि करीब 103 मिनट की होगी। पूर्ण चंद्रग्रहण रात 1 बजकर 28 मिनट से लेकर रात 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। वहीं रात 1 बजकर 55 मिनट पर चांद सबसे गहरे रंग का दिखाई देगा।

Lunar eclipse इतना लंबा चंद्रग्रहण (Lunar eclipse) 104 साल बाद आ रहा। चंद्रग्रहण पौने चार घंटे का होगा। हालांकि भारत के कई हिस्सों में लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने से महरूम रह सकते हैं. वजह है मॉनसून।

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मौसम विभाग की सूचनाओं और खगोलीय जानकारों के अनुसार भारत के कई हिस्सों में बादल छाए होने की वजह से चंद्रग्रहण को देख पाना मुश्क‍िल होगा। हालांकि जानकार उम्मीद कर रहे हैं कि अगर मौसम करवट लेता है तो लोग आसानी से अद्भुत खगोलीय घटना के गवाह बन सकेंगे।

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वैसे यह चंद्रग्रहण साउथ अमेरिका, अफ्रीका के ज्यादातर हिस्सों और वेस्ट व सेंट्रल एश‍िया में दिखाई देगा। भारत में भी आंश‍िक और पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा।

Lunar eclipse इससे पहले 31 जनवरी को इस साल पूर्ण चंद्रग्रहण लगा था, जिसमें करीब 1 घटे 16 मिनट का खग्रास था। उस दौरान आसमान साफ होने की वजह से चंद्रग्रहण आसानी से देखा गया था।

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आपको बता दें कि पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान मंगल ग्र‍ह भी धरती के काफी करीब होगा। वहीं 30 जुलाई को धरती और मंगल ग्रह के बीच दूरी कम होकर 57.58 मिलियन किमी रह जाएगी। ऐसे में आसमान साफ होने पर उसे रात में आसानी से देखा जा सकता है।Lunar eclipseवहीं 27 जुलाई को चांद धरती से सबसे ज्यादा दूरी पर होगा, यानी सबसे छोटा चांद दिखाई देगा. खगोलिय जानकारों के अनुसार छोटा चांद धरती की छाया को पार करने में ज्यादा समय लेता है. ऐसे में इस बार सबसे बड़ा चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्रग्रहण के दौरान चांद का रंग नारंगी के अलावा ब्लड रेड, डार्क ब्राउन, डार्क ग्रे रह सकता है। यह उस बात पर निर्भर करेगा कि आप धरती के किस हिस्से से उसे देख रहे हो।

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पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा की लाल आभा सूर्य के प्रकाश के पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा रिफ्लेक्ट होने के कारण होती है। पृथ्वी की छाया को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। एक मुख्य छाया क्षेत्र और दूसरा उपछाया क्षेत्र। जब चंद्रमा मुख्य छाया क्षेत्र में ढक जाता है तब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है।

Lunar eclipseइससे पहले सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण जून 2011 और 16 जुलाई, 2000 को हुआ था। जून 2011 में पूर्ण चंद्रग्रहण 100 मिनट तक देखा गया था। उस दौरान साफ आसमान होने की वजह से भारत सहित दुनियाभर के देशों के लोग आकाश की इस अद्भुत खगोलीय घटना के साक्षी बने। 16 जुलाई, 2000 को पूर्ण चंद्रग्रहण 1 घंटा 46 मिनट का था।