संगीत सुनना लगभग हर किसी को पसंद होता है, हाँ हर किसी की चॉइस अलग हो सकती है। आजकल गाने सुनने का सबसे बेहतर तरीका हैडफ़ोन के अलावा कुछ और नहीं हो सकता। बस कान में हैडफ़ोन लगाओ और बिना किसी को परेशान किये अपनी पसंद के गाने सुनते रहो। आपने गौर किया होगा की ईयरफ़ोन और हैडफ़ोन के ऊपर Left (L) या Right(R) का निशान बना हुआ होता है।

कई लोग इसी हिसाब से हैडफ़ोन को कान में लगाते भी है। पर इससे आवाज में कोई फर्क नहीं पड़ता तो फिर इन निशानों का क्या मतलब है। आपको बता दें की ये (L) और (R) के निशान दाएं और बाएं कान में लगाने के निर्देश के लिए नहीं होते। इन निशानों के पीछे Sound Engineering और रिकॉर्डिंग से जुड़े कारण है।

गाना या आवाज रिकॉर्ड करते वक्त जिसे स्टीरियो रिकॉर्डिंग भी कहा जाता है, अगर कोई धुन बाईं ओर से आ रही है, तो आपके हेडफोन के Left चैनल में यह ज्यादा तेज सुनाई देगी और Right चैनल में थोड़ी धीमी।

आप जब गाने सुनते है तो उसमे कई तरह के म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट बज रहे होते है। ये सभी आवाजें लेफ्ट और राइट चैनल के लिए अलग अलग दिशा से रिकॉर्ड की जाती है ताकि एक यंत्र की धुन में दुसरे यंत्र की ध्वनि दब न जाए और इसलिए हमे गाने के म्यूजिक में बजने वाले हर इंस्टूमेंट की आवाज स्पष्ट और साफ़ सुनाई देती है।

इसी तरह ये तरीका फिल्मों की साउंड रिकॉर्डिंग के वक्त भी अपनाया जाता है ताकि ध्वनि और वीडियो में सटीकता बनी रहे। उदाहरण के लिए आपने कभी अगर सिनेमा हॉल में बैठ कर फिल्म देखते हुए गौर भी किया होगा की अगर स्क्रीन पर कोई गाडी बायीं और से आ रही है तो उस गाडी की ध्वनि भी पहले आपको बायीं और से आती सुनाई देगी और फिर धीरे धीरे दायीं और सुनाई देने लगेगी।

एक सटीक साउंड रिकॉर्डिंग की वजह से हम दर्शक होने के बाद भी फिल्म के दृश्यों में सजीवता का एहसास कर पाते है। उम्मीद करते है आपको ये जानकारी पसंद आई होगी।